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Saturday, 3 January, 2026
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‘जंकी’ म्यूज़िक से लेकर मंदिरों में बजने तक—मलयालम रैप की बदलती पहचान

एमसी कूपर मलयालम रैप की तुलना लेखक वैकोम बशीर की लिखाई से करते हैं. ‘राज्य को रैप जैसे और सांस्कृतिक सहारे चाहिए, जो युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़े रखें.’

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कोच्चि: कोझिकोड के EMS स्टेडियम की सारी लाइटें अचानक बंद हो गईं. सिर्फ एक स्पॉटलाइट ज़मीन पर औंधे लेटे एक छोटे, स्थिर शरीर पर पड़ी—यह डूबे हुए सीरियाई बच्चे एलन कुर्दी और इस सदी की शरणार्थी त्रासदियों को याद करने का सीन था. कुछ ही सेकंड बाद, लाल धुआं और लेज़र लाइट्स अंधेरे को चीरने लगीं और 35,000 लोगों की भीड़ ज़ोर से चिल्ला उठी. अक्टूबर में सुपर लीग केरल के उद्घाटन फुटबॉल मैच में हाफ-टाइम शो के लिए मैदान पर आए वेदान—जो खुद को “बेआवाज़ों की आवाज़” कहते हैं.

दस साल पहले तक मलयालम हिप-हॉप ज़्यादातर अंडरग्राउंड था और इंटरनेट के सीमित हिस्सों तक ही था. आज इसके स्ट्रीमिंग नंबर तेज़ी से बढ़ रहे हैं, बड़े म्यूज़िक लेबल्स संपर्क कर रहे हैं और यह एक पूरी म्यूज़िक इंडस्ट्री बन चुका है.

डैबज़ी, फेजो, बेबी जीन और परिमल शैस इस ‘साउथसाइड’ मूवमेंट के बड़े नाम हैं. इसी आंदोलन से भारत का सबसे बड़ा रैप एक्सपोर्ट—हनुमैनकाइंड—निकला. ये कलाकार मलयालम भाषा को लय के साथ इस्तेमाल करते हैं और सामाजिक न्याय, मन के संघर्ष और आम ज़िंदगी की बातें करते हैं. उनकी आवाज़ों में कोच्चि की खुरदुरी टोन और मालाबार की मप्पिलापट्टु की लय सुनाई देती है.

2024 में स्पॉटिफाई पर स्थानीय भाषाओं में मलयालम सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला म्यूज़िक जॉनर रहा—अब तक इसमें 5,300 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है. नवंबर में कोच्चि में हुए करुप सायफ़र जैसे इवेंट्स, जहां 500 से ज़्यादा अंडरग्राउंड रैपर्स ने परफॉर्म किया, ने डिफ जैम, मास अपील, यूनिवर्सल और सोनी म्यूज़िक जैसे बड़े लेबल्स का ध्यान खींचा.

क्यों केरल, क्यों अभी

राज्य भर में काम कर रहे मैनेजर्स, प्रोड्यूसर्स और कलाकार मानते हैं कि केरल चुपचाप भारत का एक बड़ा हिप-हॉप सेंटर बन गया है.

मालाबार के पेरिंथलमन्ना कस्बे में हुए टिकट वाले रैप फेस्टिवल Ma’Rap में परफॉर्म करते वेदान | इंस्टाग्राम
मालाबार के पेरिंथलमन्ना कस्बे में हुए टिकट वाले रैप फेस्टिवल Ma’Rap में परफॉर्म करते वेदान | इंस्टाग्राम

टैलेंट मैनेजमेंट कंपनी Alt+ के को-फाउंडर विनायक मोहन साफ शब्दों में कहते हैं, “अगर आप स्पॉटिफाई नंबर, सोशल मीडिया के फॉलोअर्स, किए गए शोज़ और नेशनल प्लेलिस्ट्स को देखें, तो पिछले साल भारतीय हिप-हॉप का सबसे बड़ा नया चेहरा ‘गैब्री’ था—जो एक मलयाली है.”

यह उछाल सिर्फ केरल में पले लोगों तक सीमित नहीं है. तीन साल पहले, दुबई में रहने वाले 43-वर्षीय मार्केटिंग प्रोफेशनल शिबू शैम्ज़—जो अब SHAAMZ के नाम से रैप करते हैं—दुबई की आरामदायक ज़िंदगी छोड़कर कोच्चि आ गए. उन्हें लगा कि यहां कुछ बड़ा होने वाला है.

उन्होंने कहा, “यहां सब कुछ तेज़ी से बदल रहा है. केरल के रैप गाने पूरे भारत और विदेशों में चल रहे हैं. बेंगलुरु, दिल्ली और मुंबई में ये चार्ट्स में ऊपर हैं. अब मैं यूएई, यूके और कनाडा में भी मलयाली रैपर्स को आगे आते देख रहा हूं. इसी वजह से मैं यहां आया.”

केरल में रैप का उभार अचानक नहीं हुआ. इसकी शुरुआत घरों में बने छोटे स्टूडियो, नए तरह की फिल्ममेकिंग, कोविड के समय के सहयोग और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से हुई.

2019 में, म्यूज़िक प्रोड्यूसर परिमल शैस—जो तब ज़्यादा मशहूर नहीं थे, सूरज चेरुकट उर्फ हनुमैनकाइंड और एमसी कूपर के साथ एक एल्बम पर काम कर रहे थे. उनका म्यूज़िक पूरी तरह दक्षिण भारतीय और द्रविड़ अंदाज़ का था. उस समय कोच्चि में मौके कम थे, इसलिए 2020 में वे बेंगलुरु चले गए. वहीं कोविड लॉकडाउन के दौरान वे अपने रूममेट और फिल्ममेकर लेंड्रिक कुमार और हनुमैनकाइंड के साथ फंस गए.

ऑडियो इंजीनियर से म्यूज़िक प्रोड्यूसर बने परिमल शैस, केरल के लगभग सभी बड़े रैपर्स के साथ काम कर चुके हैं | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट
ऑडियो इंजीनियर से म्यूज़िक प्रोड्यूसर बने परिमल शैस, केरल के लगभग सभी बड़े रैपर्स के साथ काम कर चुके हैं | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट

लॉकडाउन के दौरान, तीनों ने ऑनलाइन म्यूज़िक और वीडियो रिलीज़ करने शुरू किए. सस्ता इंटरनेट और घर में बंद लोग कुछ नया सुनना चाहते थे. जैसे ही लॉकडाउन खत्म हुआ, देशभर में टूर शुरू हुए और रिकॉर्ड लेबल्स ने साइन कर लिया.

इसी दौरान, फिल्ममेकर आशीक अबू के सहयोग से कोच्चि म्यूज़िक फाउंडेशन ने ‘पारा’ नाम का डिजिटल हिप-हॉप फेस्टिवल कराया. यह कई रैपर्स का पहला बड़ा मंच था. आशीक अबू के जुड़ने से इस आंदोलन को भरोसा मिला. इंस्टाग्राम और स्पॉटिफाई ने कलाकारों को फैन बनाने में मदद की और मलयालम फिल्म इंडस्ट्री भी इसे नज़रअंदाज़ नहीं कर पाई.

परिमल ने कहा, “जो फिल्ममेकर दो साल पहले तक रैप म्यूज़िक को फिल्मों में लेने से हिचक रहे थे, वही अब इसे शामिल करना चाहते थे.” इससे रैप पूरी तरह मेनस्ट्रीम में आ गया.

पहले ये कलाकार ज़्यादातर कॉलेज फेस्टिवल्स में परफॉर्म करते थे, लेकिन अब सबसे बड़ी भीड़ मंदिरों और सांस्कृतिक मेलों में दिखती है. युवा दर्शकों को लाने के लिए फेस्टिवल कमेटियां हिप-हॉप को अपना रही हैं. Alt+ के मुताबिक, वडकारा के एक मंदिर उत्सव में वेदान के शो में 60,000 से ज़्यादा लोग आए. रैपर फेजो चार मंदिर उत्सवों और एक मस्जिद के कार्यक्रम में भी परफॉर्म कर चुके हैं. उन्होंने मज़ाक में कहा, “अब बस चर्च से बुलावा आना बाकी है.”

पिछले हफ्ते कोच्चि में ओचा म्यूज़िक फेस्टिवल का तीसरा एडिशन हुआ—यह अब इतना बड़ा हो चुका है कि राजा कुमारी जैसे अंतरराष्ट्रीय कलाकार भी इसमें शामिल होते हैं.

क्षेत्रीय टैलेंट

मलसरम एनोडु थन्ने गाना फेबिन जोसेफ—जो अब फेजो के नाम से जाने जाते हैं, की अंदरूनी लड़ाइयों को दिखाता है. फेजो मलयालम रैप के शुरुआती मेनस्ट्रीम सितारों में से एक हैं. स्पॉटिफाई पर उनके करीब 20 लाख मंथली लिसनर्स हैं और यूट्यूब पर 6,66,000 से ज़्यादा सब्सक्राइबर्स हैं.

कोच्चि के एक मिडिल-क्लास परिवार में पले-बढ़े फेजो का संगीत से पहला रिश्ता उनके पिता के पुराने मलयालम कैसेट्स से बना. अंग्रेज़ी रैप उन्हें काफी बाद में मिला. Akon का गाना Smack That (2006) सुनकर उन्हें अंग्रेज़ी म्यूज़िक में दिलचस्पी हुई और फिर Eminem की तेज़-तेज़ रैपिंग ने उन्हें पूरी तरह रैप का दीवाना बना दिया.

भाषा समझ में न आने की वजह से उन्होंने शुरुआत यूट्यूब पर इंटरनेशनल गानों की मलयालम पैरोडी बनाकर की. अगर आप उनका यूट्यूब पेज नीचे तक स्क्रॉल करें, तो 2013 का एक धुंधला-सा पैरोडी म्यूज़िक वीडियो मिलेगा, जिसमें एक हाथी चलाने वाला उदास महावत दिखता है, नाम है ‘कोंबा ना ना’. यह Akon के Right Now (2008) का पैरोडी था.

फेबिन जोसेफ उर्फ फेजो, जिनके ऑनलाइन स्ट्रीमिंग पर लाखों फॉलोअर्स हैं, लेकिन वे ऐसे घर में बड़े हुए जहां इंटरनेट नहीं था | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट
फेबिन जोसेफ उर्फ फेजो, जिनके ऑनलाइन स्ट्रीमिंग पर लाखों फॉलोअर्स हैं, लेकिन वे ऐसे घर में बड़े हुए जहां इंटरनेट नहीं था | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट

2018 में उनकी ज़िंदगी तब बदल गई जब कंपोज़र सुशिन श्याम ने उन्हें फिल्म Maradona (2018) में एक रैप सेगमेंट दिया. इसके बाद उन्हें और फिल्मों में मौके मिलने लगे, जिनमें Ranam (2018) का मशहूर ट्रैक Ayudhameduda भी शामिल है. आज वे उन्हीं सितारों के साथ परफॉर्म करते हैं, जिन्हें कभी दूर से देखा करते थे.

शंभू अजित, जिन्हें एमसी कूपर के नाम से जाना जाता है, 2012 में कोच्चि में लॉ के छात्र थे, जब उन्होंने अंग्रेज़ी में हज़ारों रैप वर्स लिखने शुरू किए, लेकिन कभी किसी को दिखाए नहीं.

2019 में कुछ बदला, जब उन्होंने मलयालम में लिखना शुरू किया. बचपन में टीवी पर चित्रगीतम जैसे कार्यक्रमों से जो भाषा उन्होंने सीखी थी, वही उनके लिए स्वाभाविक रास्ता बन गई.

इसके बाद उनकी साझेदारी परिमल शैस से हुई और वे उसी एल्बम का हिस्सा बने, जिसमें आगे चलकर मशहूर होने वाले हनुमैनकाइंड भी थे.

एमसी कूपर को बड़ी पहचान 2023 के हिट गाने ‘AYYAYYO’ से मिली, जिसे यूट्यूब पर 1.1 करोड़ से ज़्यादा व्यूज़ मिल चुके हैं. फिल्मों में उनका बड़ा ब्रेक फिर से सुशिन श्याम के साथ आया—फिल्म Romancham (2023) के बेहद लोकप्रिय गाने Thalatherichavar के ज़रिए.

करुप सायफर इवेंट में एक 18 साल का रैपर दौड़ता हुआ आया, एमसी कूपलर को गले लगाया और रोने लगा. वह पहले ही एक पूरा एल्बम रिकॉर्ड कर चुका था, जिसमें एक गाना कूपर को समर्पित था.

एमसी कूपर ने कहा, “अब जेनरेशन एल्फा मलयालम में कविता लिख रही है.”

वह आज के मलयालम रैप की तुलना लेखक वैकोम बशीर की बेबाक और सच्ची लेखनी से करते हैं. उन्होंने कहा, “इस राज्य को रैप जैसे और सांस्कृतिक स्तंभ चाहिए, जो युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ें.”

शंभू अजित उर्फ एमसी कूपर, लॉ ग्रेजुएट से रैपर बने | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट
शंभू अजित उर्फ एमसी कूपर, लॉ ग्रेजुएट से रैपर बने | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट

कोलैब कल्चर

मलयालम भाषा एमसी कूपर की पहचान का बड़ा हिस्सा है. उनका मानना है कि रैप ने इस भाषा को फिर से ज़िंदा किया और उसे दोबारा लोगों के सामने लाया. रैप सुनने वाले से फोकस मांगता है—वह साहित्य को समझने पर मजबूर करता है. इसने युवाओं को अपने गुस्से और बेचैनी को अपनी ही भाषा में, कूल अंदाज़ में कहने का ज़रिया दिया है.

हिप-हॉप कम्युनिटी—जिसमें डीजे, डांसर, ग्रैफिटी आर्टिस्ट और रैपर्स शामिल हैं—एक तरह से परिवार जैसी है. रैप में मिलकर काम करना आसान होता है, और केरल का सीन भी ऐसा ही है. इसी तरह Dabzee, MHR, SA और Joker द्वारा बनाया गया Malabari Banger करीब 3 करोड़ व्यूज़ तक पहुंच गया.

परिमल खुद मालाबारी हैं और बचपन में मप्पिलापट्टु सुनते हुए बड़े हुए—यह मलयालम और अरबी संगीत का भावुक मेल है. उन्होंने देखा कि यह संगीत धीरे-धीरे पीछे चला गया, लेकिन रैप के ज़रिए फिर लौट आया. 2022 में फिल्म Thallumalla का हिट गाना Mannavalan Thug इस वापसी की नींव बना. Malabari Banger ने रैप को इस इलाके की सांस्कृतिक यादों और गर्व की आवाज़ बना दिया.

पिछले साल तिरुवनंतपुरम में हुए कॉलेज म्यूज़िक फेस्टिवल Epoch 24 में परफॉर्म करते फेजो | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट
पिछले साल तिरुवनंतपुरम में हुए कॉलेज म्यूज़िक फेस्टिवल Epoch 24 में परफॉर्म करते फेजो | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट

यहां तक कि वायरल गाना AYYAYYO, जिसे परिमल ने हनुमैनकाइंड, एमसी कूपर और थिरुमली के साथ बनाया, उसमें भी शास्त्रीय वाद्य नादस्वरम का इस्तेमाल है, जिसे भारी बेस वाले ट्रैप म्यूज़िक में जोड़ा गया.

हाशिये से भविष्य तक

जो रैप कभी ‘अजीब लोगों’ और नशेड़ियों का संगीत माना जाता था, वह पहले ऑनलाइन एक्सपेरिमेंटल प्रोड्यूसर्स ने खोजा, फिर मलयालम फिल्मों का हिस्सा बना और अब आम हो चुका है. आज रैप फिल्मी साउंडट्रैक्स, बड़े फेस्टिवल्स और प्लेलिस्ट्स पर छाया हुआ है.

परिमल बताते हैं कि पिछले साल भारत के सबसे ज़्यादा स्ट्रीम होने वाले एल्बम्स में से एक था Aavesham (2024) का हिप-हॉप से भरा साउंडट्रैक. डैबज़ी का टाइटल ट्रैक Illuminati यूट्यूब पर 38 करोड़ से ज़्यादा व्यूज़ पार कर चुका है और मुंबई व हैदराबाद के बड़े डीजे ने इसे रीमिक्स किया है.

परिमल शैस के सेट में जुटी भीड़ | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट
परिमल शैस के सेट में जुटी भीड़ | फोटो: स्पेशल अरेंजमेंट

देशभर के रैप म्यूज़िक रिव्यूअर्स अब मलयालम हिप-हॉप पर नियमित रूप से लिख रहे हैं. मलयालम रैप अब नेशनल प्लेलिस्ट्स का स्थायी हिस्सा बन चुका है. अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड लेबल्स भी यहां के कलाकारों को साइन कर रहे हैं, जिससे उन्हें दूसरे देशों के कलाकारों के साथ काम करने का मौका मिल रहा है.

परिमल ने कहा, “अब रैप अंडरग्राउंड नहीं रहा. पहले मज़ाक होता था कि केरल में पत्थर फेंको तो इंजीनियर लगेगा. अब ज़्यादा संभावना है कि रैपर या प्रोड्यूसर लगे.”

(इस ग्राउंड रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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