बेंगलुरु, तीन दिसंबर (भाषा) कर्नाटक उच्च न्यायालय ने जनता दल-सेक्युलर (जद-एस) के पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना को उसके खिलाफ दर्ज बलात्कार के चार मामलों में से एक में अधीनस्थ अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को निलंबित करने से बुधवार को इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति केएस मुदगल और न्यायमूर्ति वेंकटेश नाइक टी की खंडपीठ ने कहा कि अपराध की गंभीरता, रेवन्ना के खिलाफ लंबित कई मामलों और सबूतों से छेड़छाड़ के जोखिम को देखते हुए यह जमानत के लिए उपयुक्त मामला नहीं है।
न्यायाधीशों ने कहा कि सुनवाई के दौरान भी रेवन्ना को जमानत नहीं दी गई थी और पीड़िता ने आरोपी की प्रभावशाली पृष्ठभूमि के कारण हमले की रिपोर्ट दर्ज कराने में देरी की थी।
रेवन्ना का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि दोषसिद्धि कमजोर सबूतों पर आधारित थी और ‘मीडिया ट्रायल’ से प्रभावित थी।
याचिका का विरोध करते हुए विशेष लोक अभियोजक प्रोफेसर रवि वर्मा कुमार ने पूर्व में हुए अपहरण के प्रयासों का जिक्र करते हुए दलील दी कि रेवन्ना को जमानत पर रिहा करने से पीड़िता और गवाहों को खतरा होगा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय सजा के निलंबन पर निर्णय लेने के चरण में प्रत्येक साक्ष्य का पुनर्मूल्यांकन नहीं करेगा तथा उसे अधीनस्थ अदालत के आदेश में प्रथम दृष्टया कोई त्रुटि नहीं मिली।
रेवन्ना की जमानत याचिका खारिज करने के बाद उच्च न्यायालय ने उसकी अपील पर अंतिम सुनवाई के लिए 12 जनवरी 2026 की तिथि निर्धारित की।
जिस मामले में रेवन्ना को सजा सुनाई गई है, वह 48 वर्षीय महिला से जुड़ा है, जो हसन जिले के होलेनरसीपुरा में रेवन्ना के परिवार के फार्महाउस में सहायिका के रूप में काम करती थी।
भाषा सिम्मी पारुल
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