काठमांडू, 25 नवंबर (भाषा) नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के पी ओली नीत सीपीएन-यूएमएल ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर करके प्रतिनिधि सभा को बहाल करने की मांग की और दावा किया कि इसे भंग किया जाना असंवैधानिक है।
उच्चतम न्यायालय के अधिकारियों के अनुसार, याचिका पर सीपीएन-यूएमएल यानी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) की ओर से पूर्व मुख्य सचेतक महेश बरतौला और सचेतक सुनीता बराल ने हस्ताक्षर किए हैं।
उच्चतम न्यायालय के सूचना अधिकारी नीरजन पांडेय ने कहा है कि यूएमएल द्वारा दायर याचिका की जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘अदालत फिलहाल याचिका का अध्ययन कर रही है और बुधवार को फैसला करेगी कि इसे दर्ज किया जाए या नहीं।’’
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से सुशीला कार्की की प्रधानमंत्री पद पर नियुक्ति को असंवैधानिक घोषित करने का अनुरोध किया है। उन्होंने उनकी नियुक्ति को अमान्य करने और प्रतिनिधि सभा को भंग करने की प्रधानमंत्री की सिफारिश को रद्द करने का आदेश देने का अनुरोध किया है।
प्रतिनिधिसभा की बहाली का मामला पहले से ही उच्चतम न्यायालय में लंबित है।
भाषा अमित पवनेश
पवनेश
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
