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Thursday, 30 April, 2026
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श्रम सुधार वक्त की मांग: विशेषज्ञ

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नयी दिल्ली, 21 नवंबर (भाषा) भारत में नवीनतम श्रम सुधार वक्त की मांग हैं, क्योंकि देश एआई में तेज प्रगति देख रहा है और अपने कार्यबल के हितों को प्राथमिकता दे रहा है। विशेषज्ञों ने यह बात कही।

सरकार ने श्रम कानूनों में ऐतिहासिक सुधार करते हुए शुक्रवार को सभी चार श्रम संहिताओं को अधिसूचित कर दिया। इसमें गिग कर्मचारियों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवरेज, सभी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य नियुक्ति पत्र तथा सभी क्षेत्रों में वैधानिक न्यूनतम मजदूरी और समय पर भुगतान के प्रावधान शामिल हैं।

शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी की पार्टनर पूजा रामचंदानी ने कहा कि नियोक्ताओं को अब कार्यबल संरचना की सक्रिय रूप से समीक्षा करनी होगी, रोजगार दस्तावेजों को अपडेट करना होगा तथा अनुपालन प्रणालियों को नई व्यवस्था के अनुकूल बनाना होगा।

जेएसए एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स के पार्टनर सजई सिंह ने कहा, ”विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं को रात की पाली में काम करने की अनुमति देना तथा गिग कर्मचारियों की मान्यता और उनके अधिकार प्रमुख प्रगतिशील कदम हैं। ये कदम मौजूदा समय की वास्तविकताओं को स्वीकार करते हैं।”

ईवाई इंडिया में जन सलाहकार सेवा के पार्टनर पुनीत गुप्ता ने कहा कि चार श्रम संहिताओं के कार्यान्वयन से औपचारिक कर्मचारियों को मजबूत संरक्षण और एकसमान लाभ मिलेगा, जबकि गिग एवं मंच कर्मचारी पहली बार सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में शामिल किए गए हैं।

डेलॉइट इंडिया के पार्टनर सुधाकर सेतुरमन ने कहा कि लंबे समय से प्रतीक्षित श्रम संहिताएं – जिन्हें मूल रूप से 2020 में राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली थी – आज आधिकारिक रूप से प्रभावी हो गई हैं। ये मजदूरी संरचनाओं तथा रोजगार संबंधी प्रमुख प्रावधानों में अधिक एकरूपता लाएंगी।

खेतान एंड कंपनी के पार्टनर अंशुल प्रकाश ने कहा, ”वेतन संहिता और सामाजिक सुरक्षा संहिता का आंशिक कार्यान्वयन उम्मीद के मुताबिक है…। इन संहिताओं के तहत नियमों के संबंध में व्यावहारिक अड़चनें आ सकती हैं। इन संहिताओं को संबंधित राज्य सरकारों द्वारा प्रभावी बनाना होगा।”

भाषा पाण्डेय रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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