नयी दिल्ली, 17 नवंबर (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की भारतीय पेट्रोलियम कंपनियों ने वर्ष 2026 में अमेरिका से तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) आयात करने के लिए एक वर्ष का समझौता किया है।
इस कदम को अमेरिका के साथ भारत के व्यापार अधिशेष को कम करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। यह मुद्दा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा है और इसी कारण उन्होंने अमेरिका में प्रवेश करने वाले भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है।
सोमवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों ने अनुबंध वर्ष 2026 के लिए अमेरिकी खाड़ी तट से लगभग 22 लाख टन एलपीजी आयात करने के लिए एक वर्षीय संरचित अनुबंध सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।’’
अनुबंधित मात्रा भारत के वार्षिक एलपीजी आयात का लगभग 10 प्रतिशत है और यह भारतीय बाजार के लिए पहला ऐसा अमेरिकी एलपीजी अनुबंध है।
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) वर्ष 2026 में लगभग 48 बहुत बड़े गैस वाहक जहाजों के बराबर एलपीजी आयात करेंगी। इनकी आपूर्ति अमेरिकी कंपनियां शेवरॉन, फिलिप्स और टोटलएनर्जीज़ ट्रेडिंग एसए करेंगी।
भारत ने पिछले कुछ महीनों से जारी द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के तहत अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। वर्तमान में भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग आठ प्रतिशत अमेरिका से खरीदता है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर इस एलपीजी समझौते की घोषणा की।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐतिहासिक शुरुआत! दुनिया के सबसे बड़े और सबसे तेजी से बढ़ते एलपीजी बाजारों में से एक अब अमेरिका के लिए खुल रहा है।’’
उन्होंने आगे कहा, ‘‘भारत के लोगों को सुरक्षित और सस्ती एलपीजी उपलब्ध कराने के हमारे प्रयासों के तहत हम एलपीजी आपूर्ति स्रोतों में विविधता ला रहे हैं। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों ने वर्ष 2026 के लिए लगभग 22 लाख टन (वार्षिक आयात का लगभग 10 प्रतिशत) अमेरिकी गल्फ कोस्ट से एलपीजी आयात करने का एक वर्ष का अनुबंध पूरा किया है, जो भारतीय बाजार के लिए अमेरिकी एलपीजी का पहला अनुबंध है।’
भाषा योगेश अजय
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