नयी दिल्ली, 12 नवंबर (भाषा) टाटा समूह में आंतरिक सत्ता संतुलन को लेकर विवाद बना हुआ है। नोएल टाटा अपने पुत्र नेविल को उन दो शक्तिशाली ट्रस्ट में से एक के निदेशक मंडल में शामिल कराने में सफल रहे, जो टाटा संस में बहुलांश हिस्सेदारी रखते हैं, लेकिन दूसरे ट्रस्ट में उनकी योजना सफल नहीं हो सकी। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
टाटा ट्रस्ट परमार्थ संगठनों का एक समूह है, जिसके पास टाटा संस में कुल 65.4 प्रतिशत हिस्सेदारी है। टाटा संस 156 साल पुराने टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी है, जिसमें लगभग 400 कंपनियां शामिल हैं, जिनमें से 30 सूचीबद्ध हैं।
ट्रस्ट द्वारा जारी बयान में कहा गया कि नोएल के बेटे नेविल और समूह के पूर्व कंपनी प्रमुख भास्कर भट को बुधवार को श्री दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) में नियुक्त किया गया।
एसडीटीटी के पास टाटा संस में 28 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
हालांकि, सूत्रों ने बताया कि वह इन दोनों को सर रतन टाटा ट्रस्ट (एसआरटीटी) में नियुक्त नहीं करा पाए। एसआरटीटी के पास टाटा संस में 23.6 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
सूत्रों के अनुसार, यह असफलता एसआरटीटी के ट्रस्टी और उपाध्यक्ष वेणु श्रीनिवासन की आपत्ति के कारण हुई।
श्रीनिवासन ने कहा कि नियुक्तियों का प्रस्ताव उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना लाया गया और इस पर सही तरीके से चर्चा होना आवश्यक थी।
ट्रस्ट की बैठक में यह विवाद कुछ सप्ताह पहले लंबे समय से ट्रस्टी रहे मेहली मिस्त्री कों निदेशक मंडल से हटाए जाने के बाद सामने आया।
मेहली मिस्त्री शापूरजी पलोनजी परिवार से जुड़े हैं, जिसके पास टाटा संस में 18.4 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
भाषा
योगेश अजय
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