नयी दिल्ली, 29 अक्टूबर (भाषा) नीति आयोग के वाइस चेयरमैन सुमन बेरी ने बुधवार को कहा कि सुधारों के अगले चरण में छोटे उद्यमों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के साथ जोड़ेने पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने यहां तीसरे आईएसआईडी वार्षिक सम्मेलन में कहा कि भारत अनिश्चित काल तक आयातित प्रौद्योगिकी या खंडित उत्पादन संरचनाओं पर निर्भर नहीं रह सकता।
बेरी ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा से संबंधित गणनाओं से पता चलता है कि भारत पिछली गणनाओं की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम एक अच्छी जगह से शुरुआत कर रहे हैं। लेकिन यहां हमें एक ऐसे पहलू के बारे में बात करनी है, जो उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर रहा है, और वह है विनिर्माण।’’
आम बजट में घोषित राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसे नीति आयोग को सौंपा गया है, और मंत्रिमंडल दस्तावेज अभी तैयार किया जा रहा है।
बेरी ने कहा, ‘‘हम राज्य और क्षेत्रीय स्तरों पर क्लस्टर और प्रतिस्पर्धी औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण को भारत की औद्योगिक सफलता की कुंजी मानते हैं। यह दिल्ली में नहीं बनेगा, बल्कि हमारे राज्यों और जिलों में बनेगा। इसलिए, हमें एक समान नजरिये से आगे बढ़ना होगा और ऐसी रणनीतियां बनानी होंगी जो प्रत्येक राज्य की विशिष्ट क्षमताओं को उजागर करें।’’
उन्होंने कहा कि नीति आयोग राज्यों के साथ उनके तुलनात्मक लाभ की पहचान करने के लिए साझेदारी कर रहा है।
प्रस्तावित राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन पांच प्रमुख क्षेत्रों पर जोर देगा। ये क्षेत्र कारोबारी सुगमता, भविष्य के लिए तैयार कार्यबल, एक जीवंत और गतिशील एमएसएमई क्षेत्र, प्रौद्योगिकी की उपलब्धता और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद हैं।
उन्होंने आगे कहा कि भारत में घरेलू मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करना एक और प्राथमिकता है।
भाषा पाण्डेय अजय
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