इंदौर, 29 अक्टूबर (भाषा) अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सोया खली के ऊंचे मूल्यों के कारण मांग घटने से देश से इस उत्पाद का निर्यात तेल विपणन वर्ष 2024-25 (अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025) के दौरान 11 प्रतिशत गिरकर 20.23 लाख टन रह गया। प्रसंस्करणकर्ताओं के एक संगठन ने बुधवार को यह जानकारी दी।
इंदौर स्थित सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के एक अधिकारी ने बताया कि तेल विपणन वर्ष 2024-25 में जर्मनी, फ्रांस, नेपाल, बांग्लादेश और केन्या भारतीय सोया खली के शीर्ष आयातक बनकर उभरे।
उन्होंने बताया कि आलोच्य अवधि में भारत के कुल सोया खली निर्यात की करीब 55 प्रतिशत खेप इन्हीं पांच देशों को भेजी गई।
अधिकारी के मुताबिक, तेल विपणन वर्ष 2023-24 (अक्टूबर, 2023 से सितंबर, 2024) के बीच भारत से सोया खली का निर्यात 22.75 लाख टन के स्तर पर रहा था।
सोपा के कार्यकारी निदेशक डी एन पाठक ने ‘‘पीटीआई-भाषा’’ को बताया,‘‘भारतीय सोया खली की कीमतें अमेरिका, ब्राजील और अर्जेंटीना सरीखे शीर्ष निर्यातकों के इस उत्पाद के मुकाबले ऊंची बनी हुई हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सोया खली की मांग में गिरावट कायम है।’’
प्रसंस्करण कारखानों में सोयाबीन का तेल निकाल लेने के बाद बचने वाला उत्पाद सोया खली कहलाता है। यह उत्पाद प्रोटीन का बड़ा स्त्रोत है। इससे सोया आटा और सोया बड़ी जैसे खाद्य पदार्थों के साथ ही पशु आहार तथा मुर्गियों व मछलियों का दाना भी तैयार किया जाता है।
भाषा हर्ष
मनीषा अजय
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