ढाका, 24 सितंबर (भाषा) बांग्लादेश में छात्रों के नेतृत्व वाली नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) ने फरवरी में होने वाले चुनावों से पहले मांगे गए चुनाव चिह्न को आवंटित करने से निर्वाचन आयोग (ईसी) के इनकार के बाद चुनाव अवरुद्ध करने की धमकी दी है।
एनसीपी, स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन (एसएडी) का एक बड़ा उप-समूह है, जिसने पिछले साल जुलाई विद्रोह के नाम से सड़कों पर अभियान चलाया था। इसमें तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग को सत्ता से अपदस्थ कर दिया गया था और प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस को मुख्य सलाहकार बनाया गया था।
एनसीपी के संयोजक नाहिद इस्लाम के हवाले से बुधवार को समाचार पत्रों ने कहा, ‘आयोग हमारे चुनाव चिह्न के रूप में ‘शापला’ (वाटर लिली) आवंटित न करने के लिए कोई कानूनी तर्क नहीं दे सका और इसलिए हम अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।’
यह बात निर्वाचन आयोग द्वारा इस मुद्दे पर अपना निर्णय घोषित करने के एक दिन बाद आई।
इस्लाम ने कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा औपचारिक निर्णय लिए जाने के बाद एनसीपी अपनी अंतिम प्रतिक्रिया देगी।
हालांकि, उत्तरी बांग्लादेश के लिए पार्टी के मुख्य समन्वयक सरजिस आलम ने धमकी दी कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे चुनाव रोक देंगे।
आलम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, ‘चूंकि कोई क़ानूनी बाधा नहीं है, इसलिए एनसीपी को ‘शापला’ चुनाव चिह्न मिलना ही चाहिए; इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। जब तक हमें यह नहीं मिलता, हम देखेंगे कि चुनाव कैसे होते हैं और कोई सत्ता पाने का सपना कैसे देख सकता है।’
निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद ने मंगलवार को एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि एनसीपी को उनके द्वारा मांगा गया चुनाव चिह्न आवंटित नहीं किया जाएगा क्योंकि यह ‘नियमों के अनुसार चुनाव चिह्नों की सूची में शामिल नहीं है’।
उन्होंने कहा, ”शापला’ हमारी 115 चुनाव चिह्नों की सूची में नहीं है। नियमों के अनुसार, राजनीतिक दलों को स्वीकृत सूची में से ही कोई एक चिह्न चुनना होगा।’
‘शापला’ का फूल बांग्लादेश का राष्ट्रीय प्रतीक है।
भाषा
शुभम वैभव
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