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Tuesday, 14 April, 2026
होमदेशअर्थजगतखाद्य मंत्री ने कहा, सरकार गेहूं उत्पादों के निर्यात की मांग पर 'सकारात्मक' ढंग से विचार करेगी

खाद्य मंत्री ने कहा, सरकार गेहूं उत्पादों के निर्यात की मांग पर ‘सकारात्मक’ ढंग से विचार करेगी

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नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बुधवार को कहा कि सरकार आटा और सूजी जैसे गेहूं उत्पादों के निर्यात की अनुमति देने की उद्योग जगत की मांगों पर ‘सकारात्मक’ ढंग से विचार करेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।

रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (आरएफएमएफ) की 85वीं वार्षिक आम बैठक में जोशी ने कहा कि निर्यात संबंधी निर्णयों में कई मंत्रालय शामिल होते हैं और उन्होंने अगले वर्ष के गेहूं उत्पादन पर विचार करने की आवश्यकता पर बल दिया।

जोशी ने कहा, ‘‘उपभोक्ता हित और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, हम इस पर सकारात्मक रूप से विचार करेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है।’’

चीन के बाद दुनिया के दूसरे सबसे बड़े गेहूं उत्पादक देश भारत ने घरेलू खाद्य सुरक्षा, कम फसल और बढ़ती मुद्रास्फीति की चिंताओं के कारण वर्ष 2022 में गेहूं और उसके बाद गेहूं उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है।

मंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देश ने रबी सत्र 2024-25 में 11.75 करोड़ टन का रिकॉर्ड गेहूं उत्पादन किया है।

जोशी ने कहा, ‘‘आप (गेहूं उत्पादों के) निर्यात की मांग कर रहे हैं। हम देखेंगे। हम आश्वासन नहीं दे सकते क्योंकि हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता खाद्य सुरक्षा है।’’

उन्होंने तमिलनाडु के एक मंत्री के हालिया अनुरोध का हवाला देते हुए दक्षिणी राज्यों में चावल की तुलना में गेहूं की अधिक मांग का भी उल्लेख किया।

आरएफएमएफ के अध्यक्ष नवनीत चितलांगिया ने आटा (गेहूं का आटा), मैदा (रिफाइंड आटा) और सूजी (सूजी) सहित गेहूं उत्पादों के निर्यात को चरणबद्ध तरीके से उदार बनाने की मांग की।

वर्तमान में, गेहूं के आटे के निर्यात की अनुमति केवल अग्रिम आयात प्राधिकरण के तहत ही है।

चितलांगिया ने कहा, ‘‘हम वैश्विक बाजारों का लाभ उठाने के लिए न्यूनतम 10 लाख टन गेहूं उत्पादों की अनुमति देने का सुझाव देते हैं।’’

महासंघ ने मवेशियों के स्वास्थ्य पर सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स विद सॉल्यूबल्स (डीडीजीएस) के प्रभाव पर एक व्यापक अध्ययन का भी आह्वान किया, जिसमें कहा गया कि अतिरिक्त डीडीजीएस ने पारंपरिक पशु आहार बाजारों को बाधित किया है और गेहूं के चोकर की कीमतों में गिरावट आई है।

कराधान के मुद्दे पर, उद्योग निकाय ने सरकार से 25 किलोग्राम तक के गेहूं उत्पादों के उपभोक्ता पैक पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को पांच प्रतिशत से घटाकर शून्य करने और आटा पिसाई मशीनों पर जीएसटी की मौजूदा 18 प्रतिशत दर को घटाकर पांच प्रतिशत करने की मांग की।

जोशी ने सरकार द्वारा हाल ही में कई उत्पादों पर जीएसटी दरों में की गई कटौती का स्वागत किया और उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे नई दरों के बारे में उपभोक्ताओं में जागरूकता पैदा करें।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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