मुंबई, 12 सितंबर (भाषा) बाजार नियामक सेबी ने बाजार भागीदारी के लिए कई निर्णए लिए। निदेशक मंडल की शुक्रवार को हुई बैठक में किए गए फैसलों की मुख्य बातें इस प्रकार हैं।
1. सेबी के निदेशक मंडल ने बड़ी कंपनियों के लिए आईपीओ नियमों को आसान बनाया, न्यूनतम शेयरधारिता जरूरतों को पूरा करने के लिए समयसीमा बढ़ाकर 10 साल तक किया।
2. अधिक एंकर निवेश: एंकर निवेशक आवंटन को सार्वजनिक निर्गम के एक तिहाई से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया।
3. विश्वसनीय निवेशक पहुंच: केंद्रीय बैंकों, सरकारी संपत्ति कोषों और विनियमित वैश्विक संस्थानों जैसे विश्वसनीय विदेशी निवेशकों को एकल खिड़की मंजूरी प्रदान की जाएगी।
4. संबंधित पक्ष लेनदेन: शेयरधारक अनुमोदन आवश्यकताओं के लिए सीमा संशोधित की गई।
5. आईएफएससी में एफपीआई: अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफएससी) में खुदरा योजनाएं अब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) के रूप में पंजीकृत हो सकती हैं।
6. लचीला एआईएफ ढांचा: वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) की एक नई श्रेणी में नियमों में ढील दी गई है। यह नई श्रेणी विशेष रूप से मान्यता प्राप्त निवेशकों के लिए बनाई गई है।
7. बड़े मूल्य वाले कोषों के लिए छूट: मान्यता प्राप्त निवेशकों के लिए न्यूनतम निवेश सीमा 70 करोड़ रुपये से घटाकर 25 करोड़ रुपये कर दी गई।
8. रीट का पुनर्वर्गीकरण: रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (आरईआईटी) को इक्विटी के रूप में माना जाएगा, जबकि इनविट्स म्यूचुअल फंड और विशेष निवेश फंड द्वारा निवेश के उद्देश्य के लिए हाइब्रिड उपकरण बने रहेंगे।
9. म्यूचुअल फंड वितरकों को बढ़ावा: वितरकों को शीर्ष 30 शहरों के बाहर से शुद्ध निवेश के लिए एक प्रतिशत तक प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही महिला निवेशकों द्वारा निवेश के लिए अतिरिक्त कमीशन भी मिलेगा।
10. संचालन और निगरानी: रजिस्ट्रारों के लिए विनियामक ढांचे की समीक्षा की जाएगी; निवेश सलाहकारों, अनुसंधान विश्लेषकों और बाजार अवसंरचना संस्थानों के लिए संशोधनों को मंजूरी दी जाएगी।
भाषा योगेश रमण
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