नयी दिल्ली, दो जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने थाईलैंड में कथित चोरी के लिए प्रत्यर्पण कार्यवाही का सामना कर रहे एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत दे दी है।
न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने कहा कि उस व्यक्ति तक आसानी से पहुंचा जा सकता है और वह लगातार जांच में सहयोग करने की अपनी इच्छा प्रदर्शित करता रहा है।
अदालत ने कहा कि लंबित प्रत्यर्पण अनुरोध को बिना उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के हनन के, वैधानिक ढांचे के तहत प्रभावी ढंग से निस्तारित किया जा सकता है।
एक जुलाई के आदेश में कहा गया, ‘‘चूंकि कथित अपराध थाईलैंड में हुआ था, इसलिए याचिकाकर्ता द्वारा साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ या किसी गवाह को धमकाने की कोई संभावना नहीं है। जहां तक याचिकाकर्ता के भागने का जोखिम है, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि इस न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, उसने अपना पासपोर्ट इस न्यायालय के रजिस्ट्रार को जमा कर दिया है, जिससे उसके फरार होने की संभावना कम हो गई है।’’
याचिका में कहा गया है कि शंकेश मुथा 2013 में थाईलैंड के बैंकॉक में स्थित एक इकाई फ्लॉलेस कंपनी लिमिटेड में काम करने लगा और आठ साल पूरे करने के बाद भारत लौट आया। कंपनी ने 2021 में उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसने करीब 3.89 करोड़ रुपये मूल्य के 8 हीरे चुरा लिए और भारत भाग गया।
एक आपराधिक शिकायत के बाद, सदर्न बैंकॉक आपराधिक अदालत थाईलैंड ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया और थाई अभियोजकों ने प्रत्यर्पण प्रयास शुरू किए।
भारत में, राजधानी स्थित पटियाला हाउस अदालत के समक्ष कार्यवाही शुरू हुई।
भाषा वैभव मनीषा
मनीषा
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