पटना: बिहार से पढ़ाई के लिए छात्रों के बाहर जाने में अब बड़ी कमी आई है और राज्य में ही उन्हें बेहतर तकनीकी शिक्षा मिल रही है. इससे रोजगार के मौके भी बढ़ रहे हैं. यह बात उपमुख्यमंत्री सह विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बुधवार को पटना में प्रेस वार्ता के दौरान कही.
उन्होंने कहा कि जल्द ही राज्य मंत्रिपरिषद का विस्तार होगा. साथ ही, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नीतियों को नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आगे बढ़ा रहे हैं और इस पर काम भी शुरू हो चुका है.
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पहले छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता था, जिससे बिहार का पैसा और संसाधन बाहर जाते थे. लेकिन अब यह स्थिति बदल गई है. राज्य के अलग-अलग इलाकों में ही बच्चे पढ़ रहे हैं और आगे बढ़ रहे हैं.
उन्होंने बताया कि हर साल हजारों छात्र इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक की पढ़ाई कर रहे हैं और रोजगार के लिए तैयार हो रहे हैं. सात निश्चय योजना के तहत शुरू की गई नीतियों का असर अब दिख रहा है और छात्रों को अच्छी नौकरियां मिल रही हैं.
राज्य में इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों की संख्या बढ़ने से छात्र घर के पास ही कम खर्च में पढ़ाई कर पा रहे हैं, जिससे अभिभावकों को भी राहत मिली है.
विजय कुमार चौधरी ने कहा कि विज्ञान और तकनीक का असर आज जीवन के हर क्षेत्र में दिखाई देता है. बिना इसके सामान्य जीवन भी संभव नहीं है. सुबह से रात तक की दिनचर्या में तकनीक का उपयोग हमारे काम को आसान और तेज बनाता है.
उन्होंने कहा कि कॉलेजों में ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बनाए गए हैं और पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाई गई है. इससे तकनीकी कोर्स की मांग बढ़ी है और ज्यादा छात्र इनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं.
सरकार द्वारा महिलाओं और बच्चियों को 33 फीसदी आरक्षण देने से शिक्षा और रोजगार में बड़ा बदलाव आ रहा है और बिहार महिला सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
विभागीय सचिव लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में 14,553 सीटें और पॉलिटेक्निक संस्थानों में 17,243 सीटें उपलब्ध हैं.
उन्होंने कहा कि इन संस्थानों की फीस बहुत कम है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र भी आसानी से पढ़ाई कर सकते हैं. इंजीनियरिंग कॉलेजों में नामांकन शुल्क केवल 10 रुपये और पॉलिटेक्निक में 5 रुपये है.
रोजगार के मोर्चे पर भी सरकार सक्रिय है. राज्य और संस्थान स्तर पर प्लेसमेंट सेल काम कर रहे हैं, जिसके चलते 2025-26 में अब तक करीब 15,246 छात्रों को निजी कंपनियों में नौकरी मिल चुकी है.
प्रेस वार्ता में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे.