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Thursday, 5 February, 2026
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भारत-सिंगापुर ने द्विपक्षीय वार्ता में ‘छह स्तंभों’ पर संबंधों को बढ़ाने का विचार किया

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( तस्वीरों के साथ)

सिंगापुर, 26 अगस्त (भाषा) भारत और सिंगापुर के वरिष्ठ मंत्रियों ने यहां दूसरे बहु-मंत्रालयी गोलमेज सम्मेलन में “सार्थक” चर्चा की और इस बात पर विचार किया कि दोनों देश डिजिटल, कौशल विकास, स्थिरता, स्वास्थ्य सेवा, संपर्क और उन्नत विनिर्माण में द्विपक्षीय सहयोग को कैसे बढ़ा सकते हैं।

विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा और आपसी हितों के मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने के लिए दूसरे भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन (आईएसएमआर) में भाग लिया।

भारत के वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “बैठक के दौरान नेताओं ने उभरते और भविष्य के क्षेत्रों में भारत और सिंगापुर के बीच सहयोग को और बढ़ाने के तरीकों पर जोर दिया।”

गोलमेज सम्मेलन में, सीतारमण के नेतृत्व में चारों मंत्रियों के साथ सिंगापुर में उनके समकक्ष भी शामिल हुए और सितंबर 2022 में नयी दिल्ली में आयोजित पहले आईएसएमआर की प्रगति की समीक्षा की।

आईएसएमआर का आयोजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगले महीने सिंगापुर की संभावित यात्रा से पहले यहां किया गया है।

पोस्ट के अनुसार, दोनों पक्षों ने आईएसएमआर के तहत पहचाने गए छह स्तंभों पर विचार-विमर्श किया, जिनमें “डिजिटलीकरण, कौशल विकास, स्थिरता, स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा, तथा उन्नत विनिर्माण और संपर्क” शामिल हैं।

इसमें कहा गया, “नेताओं ने भारत और सिंगापुर के बीच राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ मनाने की योजनाओं के साथ-साथ आसियान और जी20 घटनाक्रमों सहित क्षेत्रीय और वैश्विक सहयोग पर भी चर्चा की।”

जयशंकर ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “आज भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय दूसरी गोलमेज बैठक बहुत सफल रही। हमने डिजिटल, कौशल विकास, स्थिरता, स्वास्थ्य सेवा, संपर्क और उन्नत विनिर्माण में सहयोग पर चर्चा की।”

जयशंकर ने भारत-सिंगापुर साझेदारी को मजबूत करने की प्रतिबद्धता के लिए सिंगापुर के प्रतिनिधिमंडल को भी धन्यवाद दिया, जिसका नेतृत्व उप-प्रधानमंत्री और व्यापार एवं उद्योग मंत्री गान किम योंग कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि आईएसएमआर “अधिक समकालीन साझेदारी के उद्भव को सक्षम बनाता है”।

सिंगापुर के प्रतिनिधिमंडल में विदेश मंत्री डॉ. विवियन बालकृष्णन, गृह एवं विधि मंत्री के. षणमुगम, डिजिटल विकास एवं सूचना मंत्री तथा गृह मामलों के द्वितीय मंत्री जोसेफिन टेओ, जनशक्ति मंत्री तथा व्यापार एवं उद्योग मंत्री डॉ. टैन सी लेंग, तथा परिवहन व वित्त मंत्री ची होंग टाट भी शामिल थे।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन शणमुगारत्नम और प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग से मुलाकात की तथा द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।

बैठक के बाद वित्त मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि राष्ट्रपति थर्मन के साथ बैठक के दौरान, नेताओं ने “डिजिटलीकरण, हरित पहल और कौशल विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करके भारत-सिंगापुर रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने” पर चर्चा की।

इसमें कहा गया है कि सीतारमण ने राष्ट्रपति थर्मन की सराहना करते हुए कहा कि वे “बहुपक्षवाद के प्रबल समर्थक हैं, क्योंकि उन्होंने दूरगामी सुधारों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिससे सरकारें और संस्थाएं 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने में सक्षम हो सकती हैं।”

जयशंकर ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘सिंगापुर के राष्ट्रपति थरमन से संयुक्त रूप से मुलाकात कर सम्मानित महसूस कर रहा हूं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दीं। भारत-सिंगापुर रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के तरीकों पर उनके मार्गदर्शन की सराहना करता हूं।’’

चारों मंत्रियों ने प्रधानमंत्री वोंग से भी मुलाकात की।

जयशंकर ने ‘एक्स’ पर अलग से एक पोस्ट में कहा, ‘‘आज सुबह सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग से मुलाकात करके बहुत खुशी हुई। साथ में मेरी सहयोगी निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल और अश्विनी वैष्णव थे। हमने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दीं। भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन में प्रधानमंत्री वोंग की सतत सहभागिता की सराहना करता हूं।’’

आईएसएमआर एक अनूठा तंत्र है जिसकी स्थापना भारत-सिंगापुर द्विपक्षीय संबंधों के लिए नया एजेंडा तय करने के लिहाज से की गई है।

भाषा

प्रशांत अविनाश

अविनाश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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