नयी दिल्ली, 16 सितंबर (भाषा) पिछले दो दशकों से भारतीय स्क्वाश का पर्याय रहे सौरव घोषाल, जोशना चिनप्पा और दीपिका पल्लीकल संभवत: अपने आखिरी एशियाई खेलों में पदक जीने के लिए पूरा जोर लगायेंगे।
अपने छठे एशियाई खेलों में भाग लेने के लिए तैयार घोषाल और जोशना दोनों हाल ही में 37 वर्ष के हो गए हैं। स्क्वाश जैसे शारीरिक रूप से कठिन खेल के लिए यह काफी चुनौतीपूर्ण है।
अपना 32वां जन्मदिन मनाने के एक सप्ताह बाद दीपिका अपने चौथे और संभवत: आखिरी एशियाई खेलों में प्रवेश करेंगी। दो बच्चों की मां अब एकल वर्ग में चुनौती पेश नहीं करती हैं। चीन के हांग्झोउ में वह हरिंदर पाल संधू के साथ मिश्रित युगल में स्वर्ण पदक जीतने की पुरजोर कोशिश करेंगी।
घोषाल और जोशना भी अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर हैं और हांग्झोउ में होने वाली महाद्वीपीय प्रतियोगिता में वे अपने अभियान का अंत एकल स्वर्ण पदक जीत कर करना चाहेंगे। दोनों ने 2002 में अपने पहले एशियाई खेलों के बाद से क्रमशः सात और चार पदक जीते हैं।
एशियाई खेलों का स्तर हालांकि राष्ट्रमंडल खेलों जितना ऊंचा नहीं है, लेकिन घोषाल और जोशना के लिए काम आसान नहीं होगा।
घोषाल को 2014 इंचियोन एशियाई खेलों के फाइनल में मिली हार का अब तब मलाल है। वह इस मुकाबले में कुवैत से अब्दुल्ला अल मजायेन से 2-0 से आगे चल रहे थे और मैच प्वाइंट के लिए सर्विस कर रहे थे। कुवैत के खिलाड़ी ने इसके बाद हालांकि जबरदस्त वापसी कर मुकाबला अपने नाम कर लिया।
घोषाल ने कहा, ‘‘ जब मैंने शुरुआत की थी, तो कभी नहीं सोचा था कि मैं छह एशियाई खेलों में खेलूंगा। भारत का प्रतिनिधित्व करना सबसे बड़ा सम्मान रहा है।’’
पिछले साल राष्ट्रमंडल खेलों में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीतने वाले घोषाल ने कहा, ‘‘ एशियाई खेलों में उनकी सबसे बड़ी कामयाबी 2014 में टीम स्पर्धा में स्वर्ण जीतना है जबकि सबसे बड़ी निराशा इसी साल पुरुष एकल का फाइनल गंवाना था। मैंने 2006 में अपना पहला कांस्य जीता था और वह हमेशा विशेष रहेगा। इस बार मेरा लक्ष्य स्पष्ट रूप से स्वर्ण है क्योंकि मैंने अभी तक ऐसा नहीं किया है।’’
भारतीय खिलाड़ी को एकल में मलेशिया के इयान यो एनजी के बाद दूसरी वरीयता दी गई है। घोषाल विश्व में 17वें स्थान के साथ एशिया में सर्वोच्च रैंकिंग वाले खिलाड़ी हैं। घोषाल को इन खेलों में पाकिस्तान, कुवैत और हांगकांग के अपने प्रतिद्वंद्वियों से सावधान रहना होगा।
जोशना पिछले कुछ समय से चोट से जूझ रही हैं। चोट के कारण प्रतियोगिताओं से दूर रहने से उनकी रैंकिंग प्रभावित हुई है। वह रैंकिंग में 10वें से 71 स्थान पर खिसक गयी है। रैंकिंग में 70वें स्थान के साथ तन्वी खन्ना सर्वश्रेष्ठ भारतीय हैं।
एशियाई खेलों से पहले पूरी फिटनेस हासिल करने के बाद जोशना के पास पांच साल पहले जकार्ता में हासिल किए गए एकल पदक का रंग बदलने और खुद को साबित करने का एक मौका होगा। टीम स्पर्धाओं में तीन पदकों के बाद उन्होंने जकार्ता में एकल में कांस्य पदक जीता था।
प्रतियोगिता में उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वियों में शीर्ष वरीयता प्राप्त जापान की सातोमी वतनबे और हांगकांग की हो त्जे लोक शामिल हैं।
मिश्रित युगल में दीपिका पर पदक का दारोमदार होगा।
दीपिका और उनके जोड़ीदार संधू को तीन महीने पहले हांग्झोउ में एशियाई खेलों के परीक्षण कार्यक्रम में भाग लेने का मौका मिला था। इस जोड़ी ने वहां स्वर्ण जीतकर इसका पूरा फायदा उठाया था।
दीपिका को उम्मीद है कि एशियाई खेलों के लिए लगाए गए शिविर में विश्व के पूर्व नंबर एक खिलाड़ी जेम्स विलस्ट्रॉप और पूर्व विश्व चैंपियन ग्रेगरी गॉल्टियर के साथ अभ्यास करने से टीम को फायदा मिलेगा।
दीपिका इन खेलों को यादगार बनाने के लिए प्रशिक्षण के दौरान पूरा दमखम लगा रही हैं।
भारत ने जकार्ता में स्क्वाश में पांच पदक (एक रजत और चार कांस्य) के साथ अपने अभियान का समापन किया था और टीम चीन में इससे बेहतर करना चाहेगी।
भाषा आनन्द नमिता
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