नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) मुसलमानों के प्रमुख संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सोमवार को मुस्लिम समुदाय से ईद-उल-अजहा पर जानवरों की कुर्बानी करते समय सरकारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने और कुर्बानी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने का अनुरोध किया।
ईद-उल-अजहा को कुर्बानी का त्योहार भी कहा जाता है। बृहस्पतिवार को यह त्योहार मनाया जाएगा।
दुनिया भर के मुसलमान अल्लाह की रजा और उसके आदेश का पालन करते हुए अपने-अपने देशों के कानूनों के अनुसार जानवरों की बलि देते हैं। कुर्बानी देने की परंपरा सदियों पहले शुरू हुई थी जब पैगंबर इब्राहिम अल्लाह की राह में अपने बेटे इस्माइल को कुर्बान करने के लिए तैयार हो गए थे।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए, मुसलमानों को चाहिए कि वे जानवरों की कुर्बानी करते समय ऐहतियाती कदम उठाएं।
उन्होंने जानवरों की कुर्बानी की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने का अनुरोध किया।
मदनी ने सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करने और ऐसे जानवरों की कुर्बानी नहीं करने का अनुरोध किया, जिनकी कुर्बानी जायज नहीं है।
मदनी ने उनसे आग्रह किया कि जब कोई जायज कुर्बानी को रोकने की कोशिश करे तो प्रशासन को इसकी जानकारी दें।
मदनी ने मुसलमानों को ईद-उल-अजहा के मौके पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी और जोर देते हुए कहा कि जानवरों के अवशेष सड़कों, गलियों और नालियों में नहीं फेंके जाएं, बल्कि उन्हें इस तरह से दफनाया जाना चाहिए जिससे कि कोई दुर्गंध न हो।
उन्होंने लोगों से यह आग्रह भी किया कि अगर ”सांप्रदायिक तत्व किसी भी तरह का उकसावा” पैदा करें तो वे स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराएं।”
भाषा जोहेब नरेश
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