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Monday, 2 March, 2026
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पवार के इस्तीफे के फैसले पर रोने वाले कई राकांपा नेताओं का एक पैर भाजपा में है: सामना

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मुंबई, चार मई (भाषा) शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने बृहस्पतिवार को कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख पद से इस्तीफा देने के शरद पवार के फैसले पर आंसू बहाने वाले उनकी पार्टी के कई नेताओं का एक पैर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और दूसरा पैर राकांपा में है।

पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित एक संपादकीय में कहा गया कि राकांपा के कई नेता आज (भाजपा की) दहलीज पर हैं और पवार ने पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर सभी की पोल खोल दी।

सामना में कहा गया है कि अगर पवार के दिमाग में अपनी पार्टी को विभाजित होते देखने के बजाय, गरिमा के साथ पार्टी छोड़ने का विचार आया तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

संपादकीय में कहा गया, ‘‘पवार द्वारा सेवानिवृत्ति की घोषणा करते ही कई प्रमुख नेताओं के आंसू छलक पड़े, लेकिन इनमें से कइयों का एक पैर भाजपा में है और दूसरा पैर राकांपा में है।’’

इसमें सवाल किया है कि क्या कुछ नेताओं के खिलाफ विभिन्न केंद्रीय जांच एजेंसी की कार्रवाई को लेकर बेचैनी और उनका भाजपा की ओर स्पष्ट झुकाव पवार के इस्तीफे की घोषणा के पीछे की वजह हो सकता है?

इसने पिछले साल एकनाथ शिंदे द्वारा किए विद्रोह का जिक्र करते हुए कहा कि इस्तीफे की घोषणा शिवसेना की तरह राकांपा के विधायकों के चले जाने की स्थिति में संगठनात्मक ताकत का आकलन करने का उनका तरीका भी हो सकती है।

शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि शरद पवार के भतीजे और राकांपा के नेता ‘‘अजीत पवार की राजनीति का अंतिम उद्देश्य महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनना है और उनकी बेटी सुप्रिया सुले दिल्ली में रहती हैं। उनकी वहां की स्थिति अच्छी है। संसद में वह बेहतरीन काम करती हैं। हालांकि, भविष्य में उन्हें पार्टी का नेतृत्व मिला तो पिता के समान ऊंचाई तक पहुंचने के लिए उन्हें कोशिश करनी चाहिए।’’

उसने पवार को राजनीति का भीष्म करार दिया और कहा कि पवार भीष्म की तरह शैया पर असहाय नहीं पड़े रहे, बल्कि उन्होंने दिखा दिया है कि वह असली सूत्रधार है।

इससे पहले राकांपा ने ‘सामना’ में प्रकाशित इस संपादकीय में किए गए इस दावे का भी खंडन किया कि पवार के फैसले पर ‘आंसू बहाने वाले’ पार्टी के कुछ नेताओं का एक पैर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में है।

राकांपा प्रवक्ता महेश तापसे ने संवाददाताओं से कहा कि पार्टी कार्यकर्ता नहीं चाहते कि पवार इस्तीफा दें।

शरद पवार (82) ने मंगलवार को मुंबई में अपनी आत्मकथा ‘लोक माझे सांगाती’ के अद्यतन संस्करण के विमोचन कार्यक्रम में राकांपा प्रमुख के पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर सभी को चौंका दिया था। उन्होंने अपने उत्तराधिकारी पर फैसला लेने के लिए पार्टी में एक समिति भी गठित की थी।

‘सामना’ में प्रकाशित एक संपादकीय से जुड़े सवाल पर तापसे ने कहा, “पूरी राकांपा एकजुट है और पार्टी 2024 के विधानसभा चुनावों में महा विकास आघाडी (एमवीए) की ज्यादा से ज्यादी सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के लिए भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ अपने उम्मीदवार खड़े करेगी।”

भाषा सिम्मी पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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