scorecardresearch
Monday, 2 March, 2026
होमदेशन्यायालय का ‘द केरल स्टोरी’ के खिलाफ याचिका खारिज की

न्यायालय का ‘द केरल स्टोरी’ के खिलाफ याचिका खारिज की

Text Size:

नयी दिल्ली, चार मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को विवादास्पद फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ को सीबीएफसी प्रमाणन दिए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर तीसरी बार विचार करने से इनकार कर दिया।

न्यायालय ने कहा कि फिल्मों का प्रदर्शन रोकते समय अदालतों को बेहद सतर्क रहना चाहिए। फिल्म पांच मई को रिलीज होने वाली है।

प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने पहले ही फिल्म को प्रमाणित कर दिया है।

पीठ ने कहा, “आप कलाकारों, निर्माता के बारे में सोचिए… सबने मेहनत की है। फिल्मों पर स्थगन देने के बारे में आपको बहुत सावधान रहना चाहिए। बाजार तय करेगा कि क्या यह मानक के अनुरूप है या नहीं…. हम (याचिका कायम रखने के) इच्छुक नहीं हैं।”

पीठ में न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे.बी.पारदीवाला भी शामिल हैं।

यह फिल्म केरल में युवा हिंदू महिलाओं को आतंकी संगठन (आईएस) में शामिल किए जाने से पहले कथित तौर पर उनका इस्लाम में धर्मांतरण और कट्टरवाद पर आधारित है।

फिल्म के रिलीज पर रोक लगाने की मांग संबंधी याचिका पहले दो मई को न्यायालय के समक्ष आई थी। शीर्ष अदालत ने उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें कहा गया था कि यह “सबसे खराब प्रकार का नफरती बयान” और “ऑडियो-विजुअल प्रचार” है।

इसके बाद तीन मई को मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने के लिए इसका फिर से उल्लेख किया गया, लेकिन शीर्ष अदालत ने इस पर विचार करने से इनकार कर दिया और ‘जमीयत उलेमा-ए-हिंद’ सहित याचिकाकर्ताओं को उच्च न्यायालय जाने के लिए कहा।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने इस मामले का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केरल उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वह इस मामले को एक पीठ को सौंपेंगे लेकिन पीठ उपलब्ध नहीं थी।

अहमदी ने कहा, “आपने कहा था कि हम मामले की तात्कालिकता को देखने और एक पीठ गठित करने के लिए उच्च न्यायालय से संपर्क कर सकते हैं। पीठ का गठन उनके द्वारा किया गया था, उन्होंने कहा कि वे कल ही इस पर विचार कर सकते हैं।”

उनके प्रतिवेदन पर संज्ञान लेते हुए प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय ने पहले ही अपना विचार व्यक्त किया है और फिल्म पर रोक लगाने से इनकार करते हुए एक बहुत विस्तृत आदेश पारित किया है।

शीर्ष अदालत ने बुधवार को फिल्म से संबंधित याचिकाओं पर विचार करने से इनकार कर दिया था और याचिकाकर्ताओं से क्षेत्राधिकार वाले उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को कहा था।

भाषा

प्रशांत माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments