नयी दिल्ली, 4 मई (भाषा) दिल्ली तेल- तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को ज्यादातर तेल-तिलहन कीमतों में मजबूती दिखी लेकिन मूंगफली तेल तिलहन के दाम पूर्वस्तर पर बने रहे।
छुट्टी के कारण मलेशिया एक्सचेंज बंद है जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में फिलहाल लगभग एक प्रतिशत की तेजी है।
बाजार सूत्रों ने कहा कि तेल मिलों की दिक्कतें निरंतर बढ़ रही हैं क्योंकि किसान ज्यादा नीचे भाव में सरसों बेचने को राजी नहीं हैं। किसान पहले से ही असमय बरसात और ओलों की वजह से संकट में हैं और अब भाव कम लगाये जाने के बाद उनकी परेशानी और बढ़ी है।
उधर सस्ते आयातित तेलों की वजह से किसानों की उपज का बाजार में खप पाना मुश्किल हो गया है। पामोलीन तेल के भाव 4-5 महीने पहले सूरजमुखी और सोयाबीन जैसे नरम तेलों से 40 रुपये नीचे हुआ करता था, मौजूदा समय में पामोलीन, सूरजमुखी और सोयाबीन तेल के थोक भाव लगभग बराबर हो गये हैं भले ही खुदरा कीमतों में कुछ अंतर हो।
सूत्रों ने कहा कि इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार को ‘सॉफ्ट’ और ‘हार्ड’ तेल के कीमतों के अंतर को बढ़ाने की ओर ध्यान देना होगा। इसके लिए कौन सा रास्ता अपनाया जाये, इसे सरकार को तय करना चाहिये।
उन्होंने कहा कि हमारे देश में खाद्यतेलों का जो आयात होता है उसमें कमजोर आयवर्ग में खपत होने वाले ‘हार्ड आयल’- पामोलीन का लगभग 90 लाख टन का आयात किया जाता है जबकि उच्च आयवर्ग में खपत होने वाले सूरजमुखी और सोयाबीन जैसे नरम तेलों का आयात 45-50 लाख टन के लगभग होता है। इसलिए सूरजमुखी और सोयाबीन पर आयात शुल्क बढ़ाये जाने का बहुत मामूली असर हो सकता है।
केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को खाद्य तेल कंपनियों से उपभोक्ताओं के लाभ के लिए वैश्विक कीमतों में गिरावट के अनुरूप खाद्य तेल की कीमतों में कटौती करने को कहा है। खाद्य तेलों के प्रमुख आयातक देश, भारत ने विपणन वर्ष 2021-22 (नवंबर-अक्टूबर) के दौरान 1.57 लाख करोड़ रुपये के खाद्यतेलों का आयात किया।
केन्द्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने यहां प्रमुख उद्योग प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक के दौरान कहा, ‘खाद्य तेलों की कीमतों में गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द दिया जाना चाहिए।’
एक सरकारी बयान में कहा गया है कि सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) और इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईवीपीए) के प्रतिनिधि वैश्विक कीमतों में गिरावट के बीच खाद्यतेलों की खुदरा कीमतों में और कमी पर चर्चा करने के लिए बैठक में मौजूद थे।
इसके अलावा, खाद्य मंत्रालय ने उस कीमत को भी कम करने के लिए कहा है जिस कीमत पर निर्माताओं और रिफाइनरों द्वारा वितरकों को खाद्य तेलों की आपूर्ति की जाती है।
इसमें कहा गया है कि जब भी निर्माताओं/रिफाइनरों द्वारा वितरकों को कीमत में कमी की जाती है, तो उद्योग द्वारा उपभोक्ताओं को लाभ दिया जाना चाहिए।
एक सरकारी बयान में कहा गया है कि कुछ कंपनियों, जिन्होंने अपनी कीमतें कम नहीं की हैं और उनकी एमआरपी अन्य ब्रांडों की तुलना में अधिक है, को भी अपनी कीमतें कम करने की सलाह दी गई है।
सूत्रों ने कहा कि सरकार को खाद्यतेल पैकरों पर निरंतर निगरानी रखने की व्यवस्था करनी होगी। यह कहना गलत नहीं होगा कि सस्ते आयातित तेलों की वजह से ही दूध के दाम बढ़े हैं। क्योंकि देशी तेल मिलें नहीं चलेंगी तो हमें खाद्यतेलों से अपने बड़ी संख्या में दुधारू मवेशियों के लिए खल कहां से मिलेगा ?
उन्होंने कहा कि देश में तेल तिलहन बाजार को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार को 90 के दशक की पुरानी व्यवस्था पर गौर करना चाहिये जब देश तेल-तिलहन मामले में काफी हद तक आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ चला था। उस वक्त खाद्य तेलों की मांग होने पर सरकार आयात करवाकर उस खाद्यतेलों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिये उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराती थी और इससे देश के तेल उद्योग को भी अधिक दिक्कत नहीं आती थी और उपभोक्ताओं को भी खाद्यतेल सस्ते में उपलब्ध हो पाता था।
बृहस्पतिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन – 5,000-5,100 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली – 6,750-6,810 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 16,650 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,520-2,785 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 9,450 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,580-1,650 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,580-1,690 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी – 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,400 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,150 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,700 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,850 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,100 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,100 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,200 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना – 5,310-5,360 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 5,060-5,140 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
भाषा राजेश राजेश रमण
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