नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) वायुमंडलीय वैज्ञानिकों ने एल्गोरिदम तैयार कर हवा को मापने के नये तरीके का आविष्कार किया है। इस एल्गोरिदम में वाष्प गतिशीलता आंकड़ों का इस्तेमाल किया जाता है और इससे चक्रवात और तूफान जैसी बड़ी प्राकृतिक घटनाओं का अनुमान लगाने में मदद मिल सकती है।
अमेरिका के एरिजोना विश्वविद्यालय के अनुसंधानकर्ताओं ने ‘नेशनल ओसिएनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन’ (एनओएए) के दो क्रियाशील उपग्रहों से वाष्प आंकड़ा हासिल किया। इन उपग्रहों ने इंफ्रारेड विकिरण के मार्फत यह आंकड़ा रिकार्ड किया।
एनओएए मौसम पूर्वानुमान की अमेरिकी संघीय एजेंसी है।
चूंकि हवा वाष्पकणों को साथ लाकर बादल बनाने में असर डालती है इसलिए वह मौसम पूर्वानुमान पैटर्न के लिए संकेत प्रदान करती है।
यह अध्ययन ‘जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स’ में प्रकाशित हुआ है जिसमें उष्णकटिबंधीय और मध्यम ऊचाई वाले क्षेत्रों में क्षैतिज हवा के उध्वार्धर वितरण पर आंकड़ा उपलब्ध कराया गया है।
इस अध्ययन के सह लेखक और एरिजोना विश्वविद्यालय में ‘क्लाइमेट डायनामिक्स एवं हाइड्रोमेटेरियोलोजी कोलाबोरेटिव’ के निदेशक जुबिन जेंग ने कहा कि हवा वायुमंडल में बादल, एयरोसॉल, वाष्पकण, वर्षा, विकिरण को साथ लाती है।
उन्होंने कहा, ‘‘ हम हवा को कभी इतने अच्छे से नहीं जानते थे। मेरा मतलब है कि यह आखिरी मोर्चा है । यही कारण है कि मैं रोमांचित हूं। ’’
उन्होंने कहा कि और उन्नत एल्गोरिदम का इस्तेमाल करते हुए अनुसंधानकर्ता एक ही स्थान पर न केवल एक ऊंचाई बल्कि अलग-अलग ऊंचाई पर क्षैतिज हवा का अनुमान लगा पाये जो एक दशक पहले संभव नहीं था।
अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि जेंग के अनुसंधान दल के सदस्य और मुख्य लेखक आमिर ओयेड ने वाष्पकण पर नजर रखने के लिए खुली आंखों के बजाय मशीन शिक्षण एल्गोरिदम का इस्तेमाल किया।
भाषा राजकुमार माधव
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