scorecardresearch
Wednesday, 22 April, 2026
होमदेशजी20 संस्कृति कार्य समूह ‘‘सतत भविष्य के लिए जीवंत विरासत का दोहन’’ विषय पर वेबिनार आयोजित करेगा

जी20 संस्कृति कार्य समूह ‘‘सतत भविष्य के लिए जीवंत विरासत का दोहन’’ विषय पर वेबिनार आयोजित करेगा

Text Size:

नयी दिल्ली, 12 अप्रैल (भाषा) जी20 की भारत की अध्यक्षता के तहत उसके संस्कृति कार्य समूह (सीडब्ल्यूजी) द्वारा ‘‘सतत भविष्य के लिए जीवंत विरासत का दोहन’’ विषय पर एक वेबिनार का आयोजन बृहस्पतिवार को किया जायेगा।

संस्कृति मंत्रालय के अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि वेबिनार में जी20 के सदस्य देशों और अतिथि राष्ट्रों के साथ-साथ कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों सहित 29 देशों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर जीवंत विरासत के महत्व और स्थिरता की दिशा में इसकी भूमिका के बारे में विचारों का आदान-प्रदान किया जायेगा।

उन्होंने बताया कि इस वेबिनार का उद्देश्य एक समावेशी संवाद को बढ़ावा देना और सतत भविष्य के लिए जीवंत विरासत के दोहन के बारे में चर्चा करना है।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस वेबिनार का उद्देश्य समावेशी संवाद को बढ़ावा देना है और एक स्थायी भविष्य के लिए जीवंत विरासत का दोहन करने पर विशेषज्ञ-केंद्रित दृष्टिकोण से गहन चर्चा की सुविधा प्रदान करना है।

बयान में कहा गया है कि इसका लक्ष्य ज्ञान साझा करने की प्रक्रिया को बढ़ावा देना; उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों और अनुभवों से लाभ उठाना; जीवंत विरासत से जुड़ी कार्यप्रणालियों के उपयोग के क्रम में पैदा होने वाले अंतरालों, जरूरतों और अवसरों की पहचान करना है।

इसमें कहा गया है कि यह वेबिनार मूर्त और कार्रवाई-उन्मुख परिणामों को तैयार करने में जी20 के सदस्य देशों के दृष्टिकोण के बारे में भी जानकारी देगा।

बयान के अनुसार इसमें वक्ताओं के लिए तीन खंड होंगे और विशेषज्ञों को उनके संबंधित ‘टाइम जोन’ के आधार पर इन खंडों में स्थान दिया जाएगा।

अधिकारियों ने बताया कि इस वेबिनार को खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ), विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) के प्रतिनिधियों द्वारा इस विषय पर विशेषज्ञता के साथ क्रमिक रूप से संचालित किया जाएगा।

बयान के अनुसार इसे यूनेस्को (पेरिस) के यूट्यूब चैनल पर ‘लाइव स्ट्रीम’ किया जाएगा।

इसमें कहा गया है कि जीवंत विरासत सामाजिक प्रथाओं, परंपराओं और एक समुदाय विशेष के इतिहास, पहचान एवं मूल्यों को दर्शाने वाले पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित ज्ञान का एक मूर्त रूप है।

बयान में कहा गया है कि यह समुदायों के लिए सामाजिक पूंजी के रूप में कार्य करता है, साझा पहचान की भावना प्रदान करता है, सामाजिक सामंजस्य को बढ़ावा देता है, और पीढ़ी दर पीढ़ी सांस्कृतिक निरंतरता को सुनिश्चित करता है।

इसमें कहा गया है कि इनमें से कई प्रथाएं प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग और पुन: उपयोग को प्राथमिकता देती हैं, अपशिष्ट में कमी लाने और सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय कारकों के बीच संतुलन बनाए रखने में योगदान करती हैं तथा इस प्रकार स्थिरता सुनिश्चित करने में योगदान करती हैं।

बयान के अनुसार अन्य प्राथमिकताओं से संबंधित वैश्विक विषयगत वेबिनार 19 और 20 अप्रैल को निर्धारित है।

भाषा

देवेंद्र वैभव

वैभव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments