इंफाल, 10 मार्च (भाषा) पूर्वोत्तर में 19वीं सदी के मध्य में महाराजा चंद्रकीर्ति के शासन काल में मणिपुर और बर्मा (मौजूदा म्यांमा) की सीमा को अंकित करने के लिए लगाए गए तीन पत्थर गायब हो गए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
कला एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त सचिव कीथेलकपम दिनामणि ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि यह मामला तब संज्ञान में आया जब नौ सदस्यीय अनुसंधानकर्ताओं की टीम कामजोंग जिले के आंतरिक हिस्से में अनुसंधान के इरादे से गई।
उन्होंने बताया, ‘‘टीम ने पाया कि चंद्रकीर्ति महाराज के समय में लगाए गए दो पत्थर गायब हैं जिन्हें सानालोक और नाम्फलोक नदियों के संगम पर लगाया गया था।’’
दिनामणि ने बताया, ‘‘इन पत्थरों पर बंगाली भाषा में लिखा लेख और चंद्रकीर्ति महाराज के शासन की नक्काशी थी। एक अन्य पत्थर छत्रिक खुल्लेन गांव के पास लगा था जिस पर भगवान हनुमान की आकृति उकेरी गई थी और वह भी गायब है।’’
उन्होंने बताया कि अनुसंधान टीम राजधानी इंफाल से करीब 150 किलोमीटर दूर स्थित उक्त स्थान पर सात अप्रैल को तीन दिवसीय यात्रा पर गई थी।
संयुक्त सचिव ने बताया कि वे पत्थर मणिपुर राज्य की बर्मा के साथ ऐतिहासिक सीमा का अंकन करते थे।
दिनामणि ने बताया कि टीम ने स्थानीय ग्रामीणों से वे ऐतिहासिक पत्थरों को लौटाने की अपील की है और नकद इनाम तक की पेशकश की है।
उन्होंने बताया कि जिन स्थानों से ये पत्थर ‘गायब’ हुए हैं वहां पर कोई आबादी नहीं है और वे घने जंगलों से घिरे हुए हैं। यहां तक कि नजदीकी गांव भी उक्त स्थान से चार से पांच किलोमीटर दूर है।
दिनामणि ने बताया कि वर्ष 2011 में भी पुरातत्ववेत्ताओं की टीम ने पाया था कि शिलालेख युक्त इन पत्थरों को उनके मूल स्थान से हटाया गया था।
भाषा धीरज नरेश
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