कोलकाता, सात अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल में सभी राज्य-संचालित विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को राज्यपाल सी वी आनंद बोस को एक साप्ताहिक गतिविधि रिपोर्ट प्रस्तुत करने और भविष्य में किसी भी बड़े मुद्दे के बारे में उन्हें जानकारी देने के लिए कहा गया है।
राज्यपाल सी वी आनंद बोस सभी राज्य संचालित विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी हैं।
राज्यपाल बोस के इस निर्देश पर शुक्रवार को राज्य सरकार की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई और शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने कहा कि राज्य के उच्च शिक्षा विभाग को विश्वास में लिए बिना राज्यपाल के पत्र की “कोई कानूनी वैधता नहीं है”।
यह गतिरोध मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्यपाल बोस के बीच संबंधों में कड़वाहट ला सकता है।
ब्रत्य बसु ने राज्यपाल से आग्रह किया कि वह पत्र वापस लें और “किसी भी भ्रम तथा सभी अस्पष्टताओं को दूर करने” पर चर्चा करने के लिए सरकार के साथ बैठकर विचार-विमर्श करें।
ब्रत्य बसु ने पत्र पर कड़ी आपत्ति जताते हुए संवाददाताओं से कहा कि सरकार को विश्वास में लिए बिना राज्यपाल ने पत्र जारी किया था और कुछ विश्वविद्यालयों के कुलपतियों द्वारा इसके बारे में बताए जाने से पहले उन्हें पत्र के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
ब्रत्य बसु ने कहा, ‘‘ राज्यपाल और कुलपतियों के बीच प्रतिस्पर्धा का नहीं बल्कि सहयोग और समन्वय का संबंध है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के सर्वेक्षणों में हमारे राज्य के विश्वविद्यालयों को पूर्ण रूप से कार्यात्मक स्वायत्तता प्राप्त है। हम राज्यपाल के कार्यालय से कोई लड़ाई नहीं चाहते हैं। पिछले अवसरों पर, हमने राज्यपाल के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन किए थे जहां दोनों पक्षों ने तालमेल और निकट समन्वय में काम करने का दावा किया था। यह पत्र उस भावना के अनुरूप नहीं है। ’’
यह पत्र पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा तत्कालीन राज्यपाल जगदीप धनखड़ के कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को राज्य के विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति बनाने के अपने पहले के फैसले को पलटने की पृष्ठभूमि के मद्देनजर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य सरकार ने विश्वविद्यालयों के मामलों में धनखड़ की कार्यप्रणाली पर आपत्ति जताई थी।
पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने हाल ही में कहा था कि राज्यपाल सी वी आनंद बोस राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति बने रहेंगे, न कि मुख्यमंत्री, और राज्य को विश्वविद्यालय के मामलों पर उनके साथ काम करने में कोई समस्या नहीं है।
इस बीच, दो विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने शुक्रवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उन्हें इस संबंध में राज्यपाल सचिवालय से पत्र मिला है।
विश्वविद्यालयों के कुलपति के मुताबिक यह पत्र राज्यपाल सचिवालय के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी की ओर से चार अप्रैल को भेजा गया था।
इस पत्र के मुताबिक साप्ताहिक गतिविधि रिपोर्ट सप्ताह के अंतिम कार्य दिवस को ई-मेल द्वारा प्रस्तुत की जाएगी और कोई भी निर्णय जिसमें वित्तीय निहितार्थ हों, माननीय कुलाधिपति के पूर्व अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किए जा सकते हैं।
पत्र के मुताबिक विश्वविद्यालयों के कुलपति एडीसी (मेजर निखिल कुमार) के माध्यम से किसी भी बड़े मुद्दे पर माननीय कुलाधिपति से टेलीफोन या मेल पर संपर्क कर सकते हैं। पत्र में मेजर कुमार का मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी दी गई है।
पत्र में आगे कहा गया है कि राज्यपाल के वरिष्ठ विशेष सचिव देबाशीष घोष राजभवन में विश्वविद्यालय के मामलों का समन्वय करेंगे।
एक सरकारी विश्वविद्यालय के कुलपति ने अपना नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उनके कार्यालय को पहले ही पत्र मिल चुका है और उनकी जानकारी में राज्य भर के विभिन्न विश्वविद्यालयों को भी पत्र मिल चुका है।
गौरतलब है कि मार्च की शुरुआत में राज्यपाल ने अकादमिक-प्रशासनिक मामलों को चलाने में बेहतर तालमेल और समन्वय के लिए राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और शिक्षा मंत्री के साथ बैठक की थी।
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