भोपाल, तीन मार्च (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को कहा कि धर्म की आधारशिला पर संपूर्ण मानवता टिकी हुई है और यह गर्व का विषय है कि भारत की परंपरा, सामाजिक व्यवस्था और राजनीतिक गतिविधियों में प्राचीन काल से ही धर्म का महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि कई आध्यात्मिक परंपरायें भारत में उत्पन्न हुई हैं और दुनिया भर में फल-फूल रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय आध्यात्मिकता के महान बरगद के पेड़ की जड़ें देश में हैं और इसकी शाखाएं पूरे विश्व में फैली हुई हैं।
उन्होंने कहा कि मानवीय पीड़ा के कारण को समझना और उस पीड़ा से छुटकारा पाने का रास्ता दिखाना पूर्वी मानवतावाद की विशेषता है जो आज के युग में और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
राष्ट्रपति सांची यूनिवर्सिटी ऑफ़ बुद्धिस्ट-इंडिक स्टडीज के सहयोग से इंडिया फाउंडेशन द्वारा यहां आयोजित 7वें अंतरराष्ट्रीय धर्म-धम्म सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद बोल रही थीं।
उन्होंने कहा, ‘‘ धर्म-धम्म की अवधारणा, भारतीय चेतना का मूल स्वर रही है। हमारी परंपरा में कहा गया है, “धार्यते अनेन इति धर्म:” अर्थात जो सबको धारण करता है, यानी आधार देता है, वह धर्म है। धर्म की आधार-शिला पर ही पूरी मानवता टिकी हुई है। राग और द्वेष से मुक्त होकर मैत्री, करुणा और अहिंसा की भावना से व्यक्ति और समाज का विकास करना, पूर्व के मानववाद का प्रमुख संदेश रहा है।’’
उन्होंने कहा कि नैतिकता पर आधारित व्यक्तिगत आचरण तथा समाज-व्यवस्था, पूर्व के मानववाद का व्यावहारिक रूप है। नैतिकता पर आधारित ऐसी व्यवस्था को बचाए रखना और मजबूत बनाना हर व्यक्ति का कर्तव्य माना गया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि हमारे देश की परंपरा में, समाज व्यवस्था में और राजनीतिक कार्यकलापों में प्राचीन काल से ही धर्म को प्रमुख स्थान प्राप्त है। स्वाधीनता के बाद हमने जो लोकतांत्रिक व्यवस्था अपनाई, उस पर धर्म-धम्म का गहरा प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।
उन्होंने कहा, ‘‘ हमारा राष्ट्रीय चिन्ह सारनाथ के अशोक स्तम्भ से लिया गया है। हमारे राष्ट्रीय ध्वज में धर्मचक्र सुशोभित है। महात्मा गांधी ने अपने मूल्यों और कार्यों के माध्यम से भगवान बुद्ध की अहिंसा और करुणा का संदेश फैलाया।’
इस अवसर पर मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगू भाई पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इससे पहले एक अधिकारी ने बताया कि सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में 45 वक्ता होंगे। मंत्रियों का सत्र, मुख्य सत्र और विभिन्न उप-विषयों पर बहस और चर्चा करने के लिए पांच पूर्ण सत्र होंगे। साथ ही 15 सत्र में भारत और विदेश के विशेषज्ञों द्वारा 115 पत्र प्रस्तुतियां होंगी।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन में 15 देश भाग ले रहे हैं।
भाषा दिमो रंजन
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