नयी दिल्ली, दो मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने 1995 में हुई पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी बलवंत सिंह राजोआना की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की मांग वाली याचिका पर बृहस्पतिवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रखने से पहले दोषी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और केंद्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज की दलीलें सुनीं।
राजोआना पिछले 26 साल से जेल में है।
रोहतगी ने कहा कि दया याचिका के बावजूद इतने लंबे समय तक मृत्यदंड मिलने के डर में रहना राजोआना के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
उसकी दया याचिका एक दशक से अधिक समय से सरकार के समक्ष लंबित है।
शीर्ष अदालत ने पिछले साल 11 अक्टूबर को कहा था कि राजोआना की याचिका पर सुनवाई के लिए तीन न्यायाधीशों की पीठ गठित की जाएगी।
शीर्ष अदालत ने पिछले साल 28 सितंबर को राजोआना की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने की मांग से संबंधित याचिका पर फैसला लेने में केंद्र की विफलता पर असंतोष व्यक्त किया था।
रोहतगी ने कहा था कि राजोआना जनवरी 1996 से जेल में है और उसकी दया याचिका मार्च 2012 में दायर की गई थी।
उन्होंने कहा कि उनका मुवक्किल 2007 से मौत की सजा की कतार में है।
शीर्ष अदालत ने पिछले साल दो मई को केंद्र से कहा था कि वह राजोआना की ओर से दायर याचिका पर दो महीने के भीतर फैसला करे।
शीर्ष अदालत ने राजोआना की दया याचिका राष्ट्रपति के पास भेजने में देरी को लेकर भी केंद्र से सवाल किया था।
पंजाब पुलिस के पूर्व कांस्टेबल राजोआना को पंजाब सिविल सचिवालय के बाहर 31 अगस्त, 1995 को हुए एक विस्फोट में शामिल होने का दोषी ठहराया गया था, जिसमें बेअंत सिंह और 16 अन्य लोग मारे गए थे।
जुलाई 2007 में एक विशेष अदालत ने राजोआना को मौत की सजा सुनाई थी।
भाषा नेत्रपाल सुरेश
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