हाथरस (उप्र), दो मार्च (भाषा) उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले की अनुसूचित जाति/जनजाति अदालत ने तीन साल पुराने हाथरस बलात्कार-हत्या मामले के मुख्य आरोपी को दोषी करार देते हुये बृहस्पतिवार को उम्रकैद की सजा सुनाई जबकि तीन अन्य को बरी कर दिया।
इस मामले के चार आरोपियों में संदीप (20), रवि (35), लव कुश (23) और रामू (26) शामिल थे। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) एवं एससी एसटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत संदीप को दोषी पाया और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनायी। इसके अलावा उसके खिलाफ 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
संदीप के अधिवक्ता मुन्ना सिंह पुंडीर ने कहा कि संदीप के खिलाफ बलात्कार का आरोप साबित नहीं हो सका।
मामले में सीबीआई ने हत्या, सामूहिक बलात्कार और अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम की धाराओं के तहत चारों आरोपियों के खिलाफ यहां अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अदालत में आरोप पत्र दायर किया था।
पीड़िता के परिवार का प्रतिनिधित्व कर रहीं वकील सीमा कुशवाहा ने कहा कि वे इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देंगी ।
पुंडीर ने कहा, ‘मेरा मुवक्किल निर्दोष है। हम सजा के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करेंगे।’
संदीप के वकील ने कहा, ‘अदालत में अभियोजन पक्ष पर्याप्त साक्ष्य या गवाहों के साथ बलात्कार, सामूहिक बलात्कार और हत्या के आरोप साबित नहीं कर सका।’
हाथरस की 19 वर्षीय युवती के साथ उसके गांव के चार लोगों ने 14 सितंबर, 2020 को कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया था।
घटना के एक पखवाड़े बाद दिल्ली के एक अस्पताल में उसकी मौत हो गई थी। बाद में आधी रात को उसके गांव में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया था।
मृत युवती के परिवार के सदस्यों ने दावा किया था कि दाह संस्कार उनकी सहमति के बिना किया गया था और उन्हें अंतिम बार शव घर लाने की अनुमति नहीं दी गयी थी।
हाथरस कांड काफी समय तक सुर्खियों में था।
दिल्ली-उप्र सीमा पर पुलिस के साथ गतिरोध के बाद, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और पार्टी नेता प्रियंका गांधी वाद्रा ने तीन साल पहले हुई दुखद घटना के महीनों बाद दलित महिला के परिवार से मुलाकात की थी।
कोरोना संक्रमण के बीच बड़ी सभाओं पर प्रतिबंध लगाने के आदेशों का हवाला देते हुए राहुल गांधी को वहां जाने की पुलिस ने अनुमति नहीं दी थी। बाद में वह हाथरस गये थे ।
तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ’ब्रायन के हाथरस यात्रा के दौरान उनके साथ कथित मारपीट की गई थी, क्योंकि उन्होंने भी परिवार से मिलने की कोशिश की थी ।
इसी दौरान हाथरस जाते समय केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन को भी गिरफ्तार किया गया था। जेल में बंद केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन पिछले महीने की शुरुआत में लखनऊ जेल से जमानत पर रिहा हुए है ।
इस घटना ने पूरे देश में सुर्खियां बटोरी थीं और प्रदेश सरकार की विपक्ष ने खूब आलोचना की थी ।
भाषा सं जफर
रंजन
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