नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) केंद्र ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि मानवाधिकार आयोग सहित जम्मू-कश्मीर में कथित रूप से निष्क्रिय वैधानिक निकायों का मुद्दा विचाराधीन है। सरकार ने न्यायालय को इस संबंध में घटनाक्रम से अवगत कराने के लिये तीन हफ्ते का वक्त मांगा।
मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और जे.बी. पारदीवाला की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों पर ध्यान दिया कि जनहित याचिका में उठाए गए मुद्दे पर “उचित स्तर” पर विचार किया जा रहा है।
शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता पुणे निवासी वकील असीम सुहास सरोदे को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू- कश्मीर और लद्दाख को जनहित याचिका में पक्षकार बनाने का भी निर्देश दिया।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “इसे तीन हफ्ते बाद के लिये सूचीबद्ध करें।”
उन्होंने कहा कि केंद्र सुनवाई की अगली तारीख पर मामले में विकास के बारे में पीठ को अवगत कराएगा।
पिछले साल 28 नवंबर को, शीर्ष अदालत ने सरोदे की जनहित याचिका पर ध्यान दिया था जिसमें आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन राज्य में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में वैधानिक निकाय क्रियाशील नहीं हैं और मुद्दों से निपटने के लिए सॉलिसिटर जनरल की सहायता मांगी थी।
पीठ ने सरोदे को अपनी याचिका की एक प्रति विधि अधिकारी को मुहैया कराने को कहा था।
जनहित याचिका में कहा गया है कि केंद्र शासित प्रदेश में विभिन्न वैधानिक निकाय जैसे राज्य सूचना आयोग, मानवाधिकार आयोग और उपभोक्ता आयोग काम नहीं कर रहे हैं।
सरोदे ने अपनी याचिका में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी), राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और विधि आयोग को पक्ष बनाया था।
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प्रशांत नरेश
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