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Friday, 16 January, 2026
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अडाणी समूह पर हिंडनबर्ग का पलटवार, कहा- धोखाधड़ी को राष्ट्रवाद से नहीं ढंक सकते

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नयी दिल्ली, 30 जनवरी (भाषा) हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडाणी समूह की कंपनियों के शेयर भाव में गड़बड़ी संबंधी अपनी रिपोर्ट को ‘भारत पर सोचा-समझा हमला’ बताने वाले समूह के आरोप को खारिज करते हुए कहा है कि एक धोखाधड़ी को ‘राष्ट्रवाद’ या ‘कुछ बढ़ा-चढ़ाकर प्रतिक्रिया’ से ढंका नहीं जा सकता है।

हिंडनबर्ग रिसर्च ने अपनी एक रिपोर्ट में अडाणी समूह पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे। इसके बाद समूह की कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में भारी गिरावट आई है और तीन कारोबारी दिनों में ही इन कंपनियों का मूल्यांकन 70 अरब डॉलर तक घट चुका है।

अडाणी समूह ने हिंडनबर्ग रिसर्च के इन आरोपों के जवाब में रविवार शाम को 413 पृष्ठों का ‘स्पष्टीकरण’ जारी किया था। इसमें सारे आरोपों को नकारते हुए कहा गया था कि हिंडनबर्ग ने न सिर्फ एक कंपनी समूह बल्कि भारत पर भी सोचा-समझा हमला किया है।

अडाणी समूह की इस प्रतिक्रिया पर हिंडनबर्ग रिसर्च ने सोमवार को जवाब देते कहा कि उसकी रिपोर्ट को भारत पर हमला बताना गलत है। इस निवेश शोध फर्म ने कहा, ‘‘हमारा मत है कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र और उभरती महाशक्ति है जिसका भविष्य भी रोमांचित करने वाला है। इसी के साथ हमारी यह राय भी है कि खुद को भारतीय ध्वज में लपेटने वाले अडाणी समूह की ‘व्यवस्थित लूट’ से भारत के भविष्य को पीछे धकेला जा रहा है।’’

हिंडनबर्ग रिसर्च ने कहा, ‘‘एक धोखाधड़ी आखिर धोखाधड़ी ही है, भले ही इसे दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शुमार शख्स ने ही किया हो। अडाणी ने यह दावा भी किया है कि हमने प्रतिभूति एवं विदेशी मुद्रा कानूनों का खुला उल्लंघन किया है। ऐसे किसी भी कानून के बारे में अडाणी समूह के न बता पाने के बावजूद हम इस गंभीर आरोप को सिरे से नकारते हैं।’’

इसके साथ ही उसने कहा कि विदेशों में फर्जी कंपनियां बनाकर अपने शेयरों के भाव चढ़ाने संबंधी आरोपों पर अडाणी समूह के पास सीधे एवं पारदर्शी जवाब नहीं हैं। इस तरह हिंडनबर्ग रिसर्च अपनी निवेश शोध रिपोर्ट में किए गए दावों पर कायम है।

गत बुधवार को आई इस रिपोर्ट में हिंडनबर्ग ने कहा था कि दो साल की जांच में पता चला है कि अडाणी समूह दशकों से शेयरों के भाव में गड़बड़ी और लेखे-जोखे की हेराफेरी में शामिल रहा है। इसके साथ ही उसने अडाणी समूह से 88 सवालों पर जवाब भी मांगे थे।

अडाणी समूह ने रविवार शाम को इन आरोपों के जवाब में कहा था कि यह हिंडनबर्ग द्वारा भारत पर सोच-समझकर किया गया हमला है। समूह ने कहा था कि ये आरोप और कुछ नहीं सिर्फ ‘झूठ’ हैं।

अडाणी समूह ने कहा था कि यह रिपोर्ट एक कृत्रिम बाजार बनाने की कोशिश है ताकि उसके शेयरों के दाम नीचे लाकर अमेरिका की कंपनियों को वित्तीय लाभ पहुंचाया जा सके। समूह ने यह भी कहा था कि यह रिपोर्ट गलत तथ्यों पर आधारित और गलत मंशा से जारी की गई है।

समूह ने कहा था, ‘‘यह केवल किसी विशिष्ट कंपनी पर एक अवांछित हमला नहीं है, बल्कि भारत, भारतीय संस्थाओं की स्वतंत्रता, अखंडता और गुणवत्ता, तथा भारत की विकास गाथा और महत्वाकांक्षाओं पर एक सुनियोजित हमला है।’’

हिंडनबर्ग रिसर्च ने कहा कि गौतम अडाणी समूह ने अपनी प्रतिक्रिया की शुरुआत उसे ‘मैनहटन का मैंडॉफ’ बताते हुए की है। अमेरिका के बर्नाड लॉरेंस मैडॉफ को एक पोंजी घोटाले के सिलसिले में वर्ष 2008 में गिरफ्तार कर 150 साल की सजा सुनाई गई थी।

हिंडनबर्ग ने कहा कि अडाणी समूह से 88 विशेष सवाल किए गए थे जिनमें से समूह 62 का सही तरीके से जवाब देने में विफल रहा है।

शॉर्ट सेलिंग में विशेषज्ञता रखने वाली न्यूयॉर्क की इस फर्म की रिपोर्ट के बाद सिर्फ तीन कारोबारी सत्रों में ही अडाणी समूह की कंपनियों का बाजार मूल्यांकन 70 अरब डॉलर से अधिक घट गया है। इसके अलावा खुद गौतम अडाणी दुनिया के सर्वाधिक धनी लोगों की सूची में कई पायदान नीचे आ गए हैं।

हिंडनबर्ग की यह रिपोर्ट अडाणी एंटरप्राइजेज की तरफ से 20,000 करोड़ रुपये का अनुवर्ती सार्वजनिक निर्गम (एफपीओ) लाने के ऐन पहले आई। भारी बिकवाली होने से कंपनी के शेयरों के भाव निर्गम दायरे के नीचे आ चुके हैं।

भाषा

प्रेम अजय

अजय

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यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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