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Thursday, 26 February, 2026
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एनडीडीबी, अमूल, नेफेड जैविक उत्पादों के लिए राष्ट्रीय सहकारी समिति के प्रवर्तकों में शामिल होंगे

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नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी), अमूल और नेफेड हाल में घोषित जैविक खाद्य उत्पादों के लिए, राष्ट्रीय स्तर की सहकारी समिति के पांच प्रवर्तकों में शामिल होंगे। यह समिति उत्पादन, प्रमाणन और विपणन प्रणाली में सुधार करके किसानों की आय बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करेगी।

पिछले सप्ताह, मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने जैविक उत्पादों, बीजों और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए तीन नई राष्ट्रीय स्तर की बहु-राज्य सहकारी समितियों की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

बहु-राज्यीय सहकारी समिति (एमएससीएस) कानून, 2002 के तहत एक राष्ट्रीय स्तर की सहकारी जैविक सोसायटी, एक सहकारी बीज सोसायटी और एक सहकारी निर्यात सोसायटी को पंजीकृत किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, गुजरात के आणंद स्थित राष्ट्रीय जैविक सहकारी समिति की स्थापना 500 करोड़ रुपये की अधिकृत शेयर पूंजी के साथ की जाएगी। सूत्रों ने कहा कि इसकी शुरुआती चुकता शेयर पूंजी 100 करोड़ रुपये होगी।

उन्होंने कहा कि एनडीडीबी, सहकारी संस्था नेफेड, अमूल ब्रांड के तहत दुग्ध उत्पादों का विपणन करने वाली संस्था- गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ (जीसीएमएमएफ), राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ लिमिटेड (एनसीसीएफ) इस नई सोसायटी के प्रवर्तक होंगे। ये सभी, प्रारंभिक चुकता शेयर पूंजी के लिए 20-20 करोड़ रुपये का योगदान देंगे।

उन्होंने कहा कि एनडीडीबी मुख्य प्रवर्तक होगा। उन्होंने कहा कि इन उत्पादों को अमूल ब्रांड के तहत विपणन किया जाएगा। वैश्विक स्तर पर उत्पादों के विपणन के लिए एक नया ब्रांड भी पेश किया जाएगा।

प्रारंभ में, इस राष्ट्रीय स्तर की सोसायटी का ध्यान विपणन प्रणाली में सुधार करने पर होगा ताकि किसानों को उनके जैविक उत्पादों के लिए बेहतर आय प्राप्त हो सके। धीरे-धीरे प्रमाणन प्रणाली और जांच प्रयोगशालाओं को भी मजबूत किया जाएगा।

एक सूत्र ने बताया, ‘‘देश में 29 करोड़ से अधिक सदस्यों के साथ 8.54 लाख पंजीकृत सहकारी समितियां हैं। सहकारी समितियों का उपयोग जैविक समूहों और इसकी पूरी आपूर्ति श्रृंखला के विकास के लिए किया जा सकता है।’’

संभावनाओं के बारे में, सूत्रों ने कहा कि भारत की विश्व जैविक बाजार में केवल 2.7 प्रतिशत की हिस्सेदारी है और इस प्रकार विस्तार करने की एक बड़ी संभावना है।

विश्व जैविक खाद्य बाजार (वर्ष 2020 में) का कुल आकार लगभग 10 लाख करोड़ रुपये का था और उसमें से भारतीय जैविक बाजार का आकार लगभग 27,000 करोड़ रुपये (20,000 करोड़ रुपये घरेलू और 7,000 करोड़ रुपये निर्यात) का है। वहीं अमेरिका की बाजार हिस्सेदारी 40 प्रतिशत की है।

सूत्रों ने कहा कि भारतीय जैविक बाजार का आकार हर साल 20-25 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, जबकि वैश्विक बाजार सालाना 15 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है।

क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत 27 लाख हेक्टेयर जैविक भूमि के साथ चौथे स्थान पर है। ऑस्ट्रेलिया 357 लाख हेक्टेयर के साथ पहले नंबर पर है।

भाषा राजेश राजेश रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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