नयी दिल्ली, दो जनवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाले एक साइबर घोटाले के कथित सरगना को अग्रिम ज़मानत देने से इनकार कर दिया।
न्यायमूर्ति अमित महाजन ने कहा कि हिरासत में पूछताछ को अधिक प्रभावी माना जाता है और अग्रिम जमानत जांच में हस्तक्षेप करती है, इसलिए अदालत को अग्रिम जमानत देने की अपनी शक्ति का प्रयोग करने में सावधानी बरतनी चाहिए।
अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि अग्रिम ज़मानत के आदेश का इस्तेमाल कवच के तौर पर किया जा सकता है। उसने कहा कि आवेदक के खिलाफ लगाए गए आरोप हल्के नहीं हैं और उसने जांच में सहयोग नहीं किया है।
उच्च न्यायालय ने हाल के अपने आदेश में कहा कि गिरफ्तारी जांच प्रक्रिया का हिस्सा है ताकि न सिर्फ आरोपी की मौजूदगी सुनिश्चित हो, बल्कि अन्य उद्देश्यों की भी पूर्ति हो।
आदेश के मुताबिक, “ अग्रिम जमानत नियमित रूप से नहीं दी जानी चाहिए और इसे केवल तभी दिया जाना चाहिए जब अदालत आश्वस्त हो जाए कि इस असाधारण उपाय का इस्तेमाल करने की परिस्थिति है।”
साल 2020 में दर्ज एक प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि आवेदक अमेरिकी नागरिकों को धोखा देने के लिए एक फर्जी कॉल सेंटर चला रहा था। दावा किया गया कि आवेदक कॉल सेंटर का मालिक है और वह इस घोटाले में सक्रिय रूप से शामिल था जो अमेरिकी नागरिकों के ‘सोशल सोसाइटी नंबर’ का दुरुपयोग कर किया जा रहा था।
भाषा नोमान वैभव
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