नयी दिल्ली, दो जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने दूसरे देशों में भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिशानिर्देश तय करने के अनुरोध वाली एक व्यक्ति की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसे पहले संयुक्त अरब अमीरात में गलत पहचान की वजह से ‘अवैध’ तरीके से हिरासत में लिया गया था।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा की पीठ ने विदेश में भारतीयों की सुरक्षा के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) तय करने से इनकार कर दिया। हालांकि, पीठ ने माना कि नोएडा निवासी व्यापारी प्रवीण कुमार को कठिनाई का सामना करना पड़ा।
कुमार को पिछले साल 11 अक्टूबर को अबू धाबी हवाई अड्डे पर इसलिए हिरासत में ले लिया गया था, क्योंकि उनका चेहरा कथित रूप से चेहरों से पहचान करने वाले सॉफ्टवेयर में एक ‘वांछित अपराधी’ से मेल खा रहा था। उन्हें करीब चार घंटे तक अवैध हिरासत में रहना पड़ा था।
पीठ ने कहा, ‘‘हम विदेश मंत्रालय से एसओपी बनाने के लिए कैसे कह सकते हैं? इस काम के लिए भारतीय दूतावास हैं। कोई भी व्यक्ति उस देश विशेष के कानून के अधीन होता है।’’
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम विदेश मंत्रालय को दिशानिर्देश बनाने का निर्देश नहीं दे सकते। हजारों भारतीय विदेश जाते हैं। हम यह मान रहे हैं कि आपको कठिनाई का सामना करना पड़ा। क्या हम विदेश मंत्रालय से कह सकते हैं कि किसी व्यक्ति को विदेश में गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।’’
पीठ ने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को अवैध तरीके से हिरासत में लिया जाता है, तो वह राजनयिक पहुंच मांग सकता है और एसओपी से मकसद हल नहीं होगा।
उसने कहा, ‘‘आप जो चाह रहे हैं, कानून में स्वीकार्य नहीं है।’’
कुमार को यूरोप जाने के दौरान अबू धाबी में हिरासत में लिया गया था। उन्होंने इस मामले में विदेश मंत्रालय, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) और यहां संयुक्त अरब अमीरात के दूतावास को पक्ष बनाया था।
भाषा वैभव दिलीप
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