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Monday, 27 April, 2026
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प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए क्षेत्र, स्थान आधारित वृद्धि को बढ़ावा देने की जरुरत : रिपोर्ट

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नयी दिल्ली, 30 अगस्त (भाषा) भारत को अपनी प्रमुख औद्योगिक और क्षेत्रीय नीतियों को फिर से तैयार करने के लिए क्षेत्र और स्थान या गंतव्य आधारित वृद्धि से जुड़ी पहल पर ध्यान देने की जरूरत है।

मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की अर्थव्यवस्था में वृद्धि मजबूत रही है और यह तेजी से बढ़ रही है। लेकिन कमजोर सामाजिक प्रगति, बढ़ती असमानता से पता चलता है कि यह वृद्धि कई भारतीयों के जीवन की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार पर खरा उतरने में विफल रही है।

‘भारत@100 के लिए प्रतिस्पर्धात्मकता रूपरेखा’ शीर्षक की रिपोर्ट प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) और इंस्टिट्यूट फॉर कम्पेटिटिव्निस (आईएफसी) द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित की गई है। इसे ईएसी-पीएम के चेयरमैन डॉ. बिबेक देबरॉय ने जारी किया।

यह रिपोर्ट ईएसी-पीएम और आईएफसी के बीच एक सहयोगी प्रयास है। इसे संस्थान के चेयरमैन अमित कपूर और हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर माइकल ई पोर्टर और क्रिश्चियन केटेल्स ने तैयार किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘भारत को अपनी कुछ प्रमुख औद्योगिक और क्षेत्रीय नीतियों को फिर से तैयार करने के लिए क्षेत्र और गंतव्य आधारित वृद्धि की पहल की जरूरत है।’’

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि क्षेत्र और गंतव्य आधारित पहल से व्यक्तिगत समूहों और क्षेत्रों की विशेष जरूरतों की पहचान की जा सकती हैं।

इसमें यह भी कहा गया है कि भारत को ऐसी सामाजिक नीतियों को सक्षम करने की आवश्यकता है जो श्रम बाजार में काम करने वालों की रोजगारोन्मुखता को बढ़ाएं और नौकरी चाहने वालों के लिए बाधाओं को कम करें।

रिपोर्ट में पाया गया कि नियामकीय ढांचा इस उद्देश्य के लिए अनुपयुक्त है तथा ‘विरासत में मिला बाजार ढांचा भारत की वृद्धि को पीछे खींच रहा है। इसलिए भारत को प्रतिस्पर्धा से जुड़ी कंपनियों की वृद्धि के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।

भाषा जतिन अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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