नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्र, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को उस याचिका पर जवाब देने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है जिसमें आरोप लगाया गया है कि 53,000 से अधिक पुलिस अधिकारी साइकिलों का इस्तेमाल करने के नाम पर गलत तरह से भत्ता ले रहे हैं।
याचिका में इस संबंध में जांच का अनुरोध किया गया है कि पुलिस अधिकारी साइकिलों का इस्तेमाल करने के नाम पर यात्रा भत्ते के साथ साइकिल (रखरखाव) भत्ते का दावा कर रहे हैं जबकि वे साइकिल का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने वकील सनसेर पाल सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए 20 सितंबर की तारीख तय की। सिंह ने अपनी याचिका में कहा कि कोई लोकसवेक जिस भत्ते का हकदार नहीं है लेकिन उसे प्राप्त कर रहा है, यह एक तरह का भ्रष्टाचार है क्योंकि भुगतान करदाताओं की मेहनत की कमाई से किया जाता है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों को साइकिल के रख-रखाव के भत्ते के नाम पर 180 रुपये दिये जाते हैं और इस मद के तहत हर साल लाखों रुपये का भुगतान किया जाता है।
भाषा वैभव अविनाश
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