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Sunday, 12 April, 2026
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भाजपा ने आपातकाल की बरसी पर कांग्रेस को आडे हाथ लिया, लोकतंत्र पर सबसे बड़ा कायराना हमला बताया

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नयी दिल्ली/लखनऊ/ जयपुर, 25 जून (भाषा) भाजपा ने 47 साल पहले देश में आपातकाल लागू करने को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए शनिवार को कहा कि यह देश के लोकतंत्र पर ‘‘ सबसे बड़ा कायराना’’हमला था।

भाजपा ने कहा कि इस दिन को हमेशा आजाद भारत के इतिहास में काले दिन के तौर पर याद किया जाएगा।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि आपातकाल की यादें आज भी सिहरन पैदा कर देती है। साथ ही उन्होंने इस मौके को भाजपा सरकार पर हमले के लिए इस्तेमाल किया और कहा कि आज ‘‘देश में अघोषित आपात काल का खतरा मंडरा रहा है।’’

गौरतलब है कि आज के दिन वर्ष 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लगाने की घोषणा की थी और नागरिकों के मौलिक अधिकारों को निलंबित करने के साथ प्रेस को सेंसरशिप के दायरे में लाया था। आपातकाल के दौरान कई विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया था। देश से 21 मार्च 1977 को आपातकाल हटाने की घोषणा की गई थी।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता के लालच में आपातकाल की घोषणा की थी और ‘‘भारतीयों के सवैंधानिक अधिकारों को रातोंरात छिन लिया था व निर्दयता के मामले में विदेशी शासन को भी पीछे छोड़ दिया था।

उन्होंने अपने ट्वीट में उन लोगों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने ‘‘तानाशाही’’ मानसिकता के खिलाफ लड़ाई लड़ी।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लखनऊ स्थित प्रदेश मुख्यालय पर ‘लोकतंत्र के काला अध्याय: आपातकाल (काला दिवस)’ विषयक संगोष्ठी में आपातकाल के विरोध में आवाज उठाने वाले लोकतंत्र रक्षक सेनानियों को सम्मानित करने के बाद समारोह को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा, ”सत्ता के लालच में एक परिवार ने देश पर आपातकाल थोपा था। आज ही के दिन 47 वर्ष पूर्व कांग्रेस द्वारा थोपा गया आपातकाल देश के प्रजातंत्र पर किया गया सबसे बड़ा और कायराना हमला था।”

उन्होंने दावा किया,”आपातकाल के दौरान लोगों से अंग्रेजी शासन से भी बुरा व्यवहार किया गया, इस निर्णय का विरोध करने वालों को कड़ी यातनाएं दी गईं, अकारण ही लाखों लोगों को जेल में ठूंस दिया गया और अदालतों और प्रेस पर भी सेंसरशिप लगा दी गई।”

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को कहा कि 1975 में कांग्रेस ने देश में आपातकाल लगाकर लोकतंत्र की हत्या कर दी थी और इस कदम का विरोध करने वालों को जेल में डाल दिया गया था।

मुख्यमंत्री धामी ने आपातकाल की 47वीं वर्षगांठ पर शनिवार को रुद्रपुर में भाजपा के जिला कार्यालय में ‘लोकतंत्र के सेनानियों’ के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में डिजिटल तौर पर शिरकत की।

इस दौरान उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में 25 जून 1975 का दिन सदैव ‘‘काले अध्याय’’ के रूप में याद किया जाएगा।

इस मौके पर आपातकाल के विरोध में जेल गए 28 ‘लोकतंत्र के सेनानियों’ को शॉल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

देश में 25 जून 1975 को आपातकाल लागू किए जाने के विरो€ध में राजस्थान में भाजपा ने शनिवार को ‘काला दिवस’ मनाया।

राजधानी जयपुर सहित कई शहरों में पार्टी कार्यकर्ताओं ने ‘काला दिवस’ मनाते हुए धरना दिया और बांह पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया।

भाजपा कार्यकर्ताओं की ओर से जयपुर, अजमेर, टोंक, धौलपुर, बीकानेर, नागौर सहित कई जिला मुख्यालयों पर धरना दिया गया।

भाजपा के जयपुर स्थित कार्यालय में आपातकाल के विषय पर आयोजित संगोष्ठी को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां ने संबोधित किया। इस अवसर पर जनसंघ से लेकर संगठन की सेवा में कार्यरत लोकतंत्र के सेनानियों का सम्मान किया गया।

पूनियां ने सोशल मीडिया पर ‘भारतीय लोकतंत्र और राजनीति के सबसे काले अध्याय आपातकाल’ विषय पर लोगों से संवाद भी किया।

अखिलेश यादव ने लखनऊ में जारी बयान में कहा कि देश में आपातकाल के 47 वर्ष बीत चुके हैं पर आज भी 25 जून 1975 की याद सिहरन पैदा कर देती है और अमृत काल (आजादी के 75वें वर्ष) में भी लोकतंत्र की हत्या जारी है।

उन्होंने भाजपा की मौजूदा सरकार पर हमला करते हुए कहा कि आज फिर देश पर अघोषित आपातकाल की छाया मंडरा रही है और अमृतकाल में भी लोकतंत्र की हत्या जारी है।

सपा अध्यक्ष ने कहा, ”आर्थिक विषमता, सामाजिक अन्याय का बढ़ना जारी है। अमीर ज्यादा अमीर, गरीब और ज्यादा गरीब होता जा रहा है। असहिष्णुता और नफरत ने सामाजिक सद्भाव को छिन्न-भिन्न कर दिया है।”

उन्होंने दावा किया ,”संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है। किसानों-नौजवानों की आवाज को कुचला जा रहा है और बेरोजगारी में वृद्धि जारी है, महिलाएं-बच्चियां सर्वाधिक अपमान की यंत्रणाएं भोग रही हैं।”

आम आदमी पार्टी नेता और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आपातकाल को देश के लोकतंत्र पर ‘‘बड़ा धब्बा’’ करार दिया।

उन्होंने कहा, ‘‘…आज, भारत के इतिहास का ऐसा दिन है जो भारत के लोकतंत्र पर बड़ा धब्बा है। आज ही के दिन वर्ष 1975 में देश में आपातकाल की घोषणा की गई थी और लोगों की आवाज दबाई गई थी।’’

भाषा धीरज पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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