शिलांग, 25 जून (भाषा) मेघालय उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह पता लगाए कि चूनापत्थर के खनन के लिए जारी लाइसेंस का इस खनिज के निर्यात के लिए कहीं दुरुपयोग तो नहीं किया गया।
अदालत ने कहा कि चूनापत्थर के ‘गौण’ खनिज के रूप में खनन के लिए लाइसेंस तभी जारी किया जा सकता है जब इस उत्पाद का अंतिम इस्तेमाल निर्माण कार्य में किया जाए।
उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा, “राज्य के हलफनामे में इसका उल्लेख होना चाहिए कि चूनापत्थर के एक गौण खनिज के रूप में खनन के लिए किसी व्यक्ति को जारी लाइसेंस का इस्तेमाल क्या गलत तरीके से किसी देश को निर्यात करने के लिए किया जा रहा है?”
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि राज्य को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि 2005 के कानून के तहत संबंधित विभाग को जारी प्रश्नों का जवाब कानूनी तरीके से दिया जाए।
याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष एक चालान पेश किया जिसका इस्तेमाल खनन करने वाले और निर्यातक देश के बाहर चूनापत्थर का निर्यात करने के लिए करते हैं। चालान में स्पष्ट रूप से लिखा था कि चूनापत्थर का एक गौण खनिज के रूप में खनन किया जाता है और उसका व्यापार किया जाता है।
याचिकाकर्ता ने कहा कि उसे चूनापत्थर के खनन से संबंधित चालान की एक प्रति मिली जिससे अनियमितताओं का पता चलता है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 जुलाई की तारीख तय की है।
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