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Thursday, 30 April, 2026
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भारतीय संविधान सिर्फ एक किताब नहीं बल्कि एक विचार और प्रतिबद्धता है: मोदी

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नयी दिल्ली, 18 जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि कई भुला दिए गए स्वतंत्रता सेनानियों और भारत की आजादी के संघर्ष से जुड़ी घटनाओं की कहानियां ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के जरिए सामने आ रही हैं।

वयोवृद्ध पत्रकार राम बहादुर राय की पुस्तक, ‘भारतीय संविधान: अनकही कहानी’ के विमोचन के मौके पर मोदी ने कहा कि यह इस अभियान को गति देगी और देश की अतीत की स्मृति को भविष्य में और मजबूत बनाएगी।

मोदी ने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव स्वतंत्रता आंदोलन के अनकहे अध्यायों को सामने लाने के लिए सामूहिक प्रयास कर रहा है। जो सेनानी अपना सर्वस्व अर्पण करने के बाद भी विस्मृत रह गए, जो घटनाएं आजादी की लड़ाई को नयी दिशा देने के बावजूद भुला दी गईं और जो विचार आजादी की लड़ाई को ऊर्जा देते रहे, फिर भी आजादी के बाद हमारे संकल्पों से दूर हो गए, देश आज उन्हें फिर से एक सूत्र में पिरो रहा है, ताकि भविष्य के भारत में अतीत की चेतना और मजबूत हो सके।

इस कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह मौजूद थे।

मोदी ने अपने वीडियो संबोधन के दौरान पुस्तक की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह पाठकों को संविधान के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराती है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह संविधान को व्यापक रूप में प्रस्तुत करेगी और भारत के स्वतंत्रता संग्राम का अध्ययन करने वाले देश के युवाओं के नजरिये को एक नया आयाम देगी।

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान सिर्फ एक किताब नहीं बल्कि एक विचार और प्रतिबद्धता है। संविधान राष्ट्र की स्वतंत्रता में उसके विश्वास का भी प्रतीक है।

मोदी ने कहा कि कर्तव्य और अधिकार एक दूसरे से संबंधित हैं, और कर्तव्यों पर जोर ‘‘हमारे अधिकारों को भी मजबूत करता है।’’

मोदी ने संविधान की जीवंत प्रकृति पर जोर देते हुए कहा कि भारत स्वभाव से एक स्वतंत्र सोच वाला देश रहा है और जड़ता हमारे मूल स्वभाव का हिस्सा नहीं है।

उन्होंने कहा, “संविधान सभा के गठन से लेकर इसकी बहस तक, संविधान को अपनाने से लेकर इसके वर्तमान स्वरूप तक, हमने लगातार एक गतिशील और प्रगतिशील संविधान देखा है। हमने संविधान को लेकर तर्क दिया है, सवाल उठाए हैं, बहस की है और इसमें संशोधन भी किए हैं।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा संविधान स्वतंत्र भारत की एक दृष्टि के रूप में लोगों के सामने आया जो देश की कई पीढ़ियों के सपनों को पूरा कर सके।

मोदी ने कहा कि कर्तव्य और अधिकार संबंधित हैं, और कर्तव्यों पर जोर हमारे अधिकारों को भी मजबूत करता है।

उन्होंने कहा, “अधिकारों और कर्तव्यों का तालमेल ही हमारे संविधान को इतना खास बनाता है।”

मोदी ने कहा, “18 जून को ही मूल संविधान के पहले संशोधन पर तत्कालीन राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद ने हस्ताक्षर किए थे। यानी, आज का दिन हमारे संविधान की लोकतान्त्रिक गतिशीलता का पहला दिन था। और इसी दिन आज हम संविधान को एक विशेष दृष्टि से देखने वाली इस किताब का लोकार्पण कर रहे हैं। यही हमारे संविधान की सबसे बड़ी ताकत है, जो हमें विचारों की विविधता और तथ्य-सत्य के अन्वेषण की प्रेरणा देती है।”

भाषा रवि कांत प्रशांत

प्रशांत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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