कोलकाता, सात जून (भाषा) पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा निजी स्कूलों के शुल्क ढांचे पर नज़र रखने के लिए एक नियामक बनाए जाने की अटकलों के बीच राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु ने कहा कि सरकार इस उद्देश्य के लिए एक आयोग बनाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।
उन्होंने हालांकि कहा कि प्रस्ताव की रूपरेखा अभी तैयार नहीं हुई है।
अभिभावकों के एक मंच द्वारा आरोप लगाया गया है कि कई निजी स्कूलों ने बिजली, परिवहन और विकास के नाम पर महामारी के दौरान भी भारी शुल्क वसूला जबकि विद्यालय परिसर पूरे दो साल बंद थे और केवल ऑनलाइन कक्षाएं हो रही थीं।
‘यूनाइटेड गार्जियन्स एसोसिएशन’ ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था।
बसु ने सोमवार को पत्रकारों से कहा ”हम इस मुद्दे पर पूरी गंभीरता के साथ विचार कर रहे हैं, लेकिन रूपरेखा अभी तैयार नहीं हुई है।”
सगंठन के राज्य सचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा ”हम सरकार से कुछ निजी स्कूलों की गतिविधियों को विनियमित करने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह कर रहे हैं। हमें उम्मीद है कि शिक्षा विभाग अब इस मुद्दे पर कुछ कदम उठाएगा।”
राममोहन मिशन स्कूल के प्राचार्य सुजॉय बिस्वास ने कहा ‘हम हर उस कदम के लिए तैयार हैं, जिससे विद्यार्थियों को लाभ और शैक्षिक स्तर सुनिश्चित होगा, लेकिन हमें उम्मीद है कि सरकार दोनों पक्षों की बात सुनेगी।”
‘ला मार्टिनियर’ स्कूल के सचिव सुप्रियो धर ने कहा ”हमारे विद्यार्थियों के अभिभावकों द्वारा शुल्क को लेकर कोई शिकायत नहीं की गई है। हम हमेशा विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की समस्याओं को देखते हैं और उसके अनुसार कदम उठाते हैं।’
भाषा
फाल्गुनी अविनाश
अविनाश
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.