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Monday, 20 April, 2026
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सरमा ने पत्नी, बेटे के व्यापारिक साझेदारों की कंपनियों को पीपीई किट आपूर्ति के ठेके दिये: सिसोदिया

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नयी दिल्ली/गुवाहाटी, चार जून (भाषा) आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मनीष सिसोदिया ने शनिवार को मीडिया में आई खबरों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि भारत 2020 में जब कोविड महामारी से जूझ रहा था, तब असम के स्वास्थ्य मंत्री रहे हिमंत बिस्व सरमा ने अपनी पत्नी और बेटे के व्यापारिक साझेदारों की कंपनियों को पीपीई किट की आपूर्ति करने के लिए ठेके दिये थे।

हालांकि असम सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा का परिवार महामारी के दौरान पीपीई किट की आपूर्ति में कथित कदाचार में शामिल था।

सिसोदिया ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि असम सरकार ने अन्य कंपनियों से 600 रुपये प्रति किट के हिसाब से पीपीई किट खरीदी। उन्होंने कहा कि सरमा ने ‘‘कोविड-19 आपात स्थिति का लाभ उठाते हुए’’ अपनी पत्नी और बेटे के व्यापारिक साझेदारों की कंपनियों को एक पीपीई किट 990 रुपये के हिसाब से तत्काल आपूर्ति करने के आदेश दिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरमा की पत्नी की फर्म चिकित्सा उपकरणों का कारोबार भी नहीं करती है। सिसोदिया ने खबर के हवाले से कहा, ‘‘हालांकि सरमा की पत्नी की फर्म को दिया गया अनुबंध रद्द कर दिया गया था, क्योंकि कंपनी पीपीई किट की आपूर्ति नहीं कर सकती थी, एक अन्य आपूर्ति आदेश उनके बेटे के व्यापारिक साझेदारों से संबंधित कंपनी को 1,680 रुपये प्रति किट की दर से दिया गया था।’’

इस बीच असम सरकार ने शनिवार को मीडिया के एक वर्ग में सामने आये उन आरोपों का खंडन किया कि मुख्यमंत्री सरमा का परिवार महामारी के दौरान पीपीई किट की आपूर्ति में कथित कदाचार में शामिल था।

असम सरकार के प्रवक्ता पीयूष हजारिका ने कहा कि पीपीई किट की आपूर्ति में कोई घोटाला नहीं हुआ है और मुख्यमंत्री के परिवार का कोई भी सदस्य कोविड महामारी से संबंधित किसी भी सामग्री की आपूर्ति में शामिल नहीं था।

राज्य के जल संसाधन और सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री हजारिका ने गुवाहाटी में संवाददाताओं से कहा, ‘‘आरोप झूठे, काल्पनिक, दुर्भावनापूर्ण हैं और इसे निहित स्वार्थों वाले एक निश्चित वर्ग की करतूत कहा जा सकता है।’’

हजारिका ने पूछा, ‘‘झूठे और निराधार आरोप लगाने के बजाय सबूत के साथ दोनों मीडिया संस्थान (जिन्होंने दावा किया है) अदालत क्यों नहीं जा रहे हैं।’’

सिसोदिया ने कहा कि दो वेबसाइट ने इस खबर पर काम किया और दो दिन पहले इसे प्रकाशित किया।

दो डिजिटल मीडिया संस्थानों – नई दिल्ली स्थित ‘द वायर’ और गुवाहाटी स्थित ‘द क्रॉस करंट’ की एक संयुक्त रिपोर्ट में दावा किया गया है कि असम सरकार ने उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना कोविड-19 संबंधित चार आपातकालीन चिकित्सा आपूर्ति के ऑर्डर दिए थे।

‘आप’ नेता ने पूछा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा शासित राज्य के एक मुख्यमंत्री द्वारा कथित भ्रष्टाचार पर भाजपा के सदस्य चुप क्यों हैं?

सिसोदिया ने कहा, ‘‘वे भ्रष्टाचार की बात करते हैं और विपक्षी दलों के सदस्यों के खिलाफ निराधार आरोप लगाते हैं। मैं भ्रष्टाचार के बारे में उनकी समझ के बारे में जानना चाहता हूं। उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या वे इसे (असम मामला) भ्रष्टाचार मानते हैं या नहीं।’’

उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को भ्रष्टाचार के ‘‘फर्जी’’ आरोपों में गिरफ्तार किया और केंद्र ने शुक्रवार को अदालत से कहा कि वह ‘‘एक आरोपी नहीं’’ हैं।

गौरतलब है कि ईडी ने 30 मई को धनशोधन मामले में जैन को कई घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था।

हजारिका ने कहा कि दो साल पहले महामारी के प्रकोप के दौरान, कोई नहीं जानता था कि स्थिति से कैसे निपटा जाए और विशेषज्ञों का कहना था कि पीपीई कोविड संक्रमण से निपटने के लिए पूर्ण सुरक्षा प्रदान कर सकता है। उन्होंने कहा कि लेकिन असम में किट बनाने वाली कोई कंपनी नहीं थी जबकि कई अन्य राज्यों ने किट की आपूर्ति करनी बंद कर दी थी क्योंकि उन्हें खुद उनकी जरूरत थी।

उस समय राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रहे हजारिका ने कहा, ‘‘आपात स्थिति के दौरान, सामान्य नियमों का पालन करना संभव नहीं होता है। मंत्रिमंडल ने फैसला लिया था कि एक समिति बनाई जाएगी और अगर इसके सदस्यों ने स्थिति से निपटने के लिए जरूरी किट और उपकरण खरीदने की मंजूरी दे दी तो इन्हें खरीदा जा सकता है।’’

उन्होंने कहा कि इसके बाद पीपीई किट के लिए 35 कंपनियों को ऑर्डर दिए गए और अंत में केवल नौ कंपनियां ही सरकार को इनकी आपूर्ति कर सकीं। उन्होंने कहा कि पोर्टल द्वारा संदर्भित फर्म को केवल 85 लाख रुपये का ऑर्डर दिया गया था।

हजारिका ने पूछा, ‘‘कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत कुछ पीपीई किट की व्यवस्था की गई थी, लेकिन सरकार की ओर से एक पैसा भी नहीं गया। तो कोई घोटाला कैसे हो सकता है?”

विपक्षी दल कांग्रेस, रायजर दल और असम जातीय परिषद (एजेपी) ने 2020 में पीपीई किट की आपूर्ति में कथित अनियमितताओं की केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) या किसी अन्य केंद्रीय एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी।

मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी सरमा भुइयां ने ट्वीट किया कि महामारी के पहले सप्ताह में असम में एक भी पीपीई किट उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने कहा, ‘‘इसी का संज्ञान लेते हुए, मैं एक व्यावसायिक परिचित के पास पहुंची और बहुत प्रयास के बाद एनएचएम (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) को लगभग 1500 पीपीई किट वितरित की। बाद में, मैंने इसे अपने सीएसआर के हिस्से के रूप में मानने के लिए एनएचएम को एक पत्र लिखा।’’

भुइयां ने दावा किया कि उन्होंने पीपीई किट की आपूर्ति के लिए ‘‘एक पैसा’’ भी नहीं लिया।

भाषा देवेंद्र उमा

उमा

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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