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Saturday, 7 March, 2026
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अदालत ने महिला को अपने बच्चे की गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी ठहराया

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( प्रादे17 आमुख और दूसरे पैरा में सुधार के बाद रिपीट )

ठाणे (महाराष्ट्र), 15 अप्रैल (भाषा) महाराष्ट्र के ठाणे जिले की एक अदालत ने 29 वर्षीय एक महिला को अपने बच्चे की गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी ठहराया है। महिला को जितनी अवधि की कैद की सजा सुनाई गई है, उतनी सजा वह अगस्त 2018 में गिरफ्तारी के बाद से काट चुकी है।

भिवंडी तालुका के धाप्सीपाड़ा की रहने वाली महिला को नौ अप्रैल को अदालत ने दोषी ठहराया था, लेकिन उस फैसले की प्रति शुक्रवार को उपलब्ध हो पाई।

ठाणे के अतिरिक्त सत्र अदालत के न्यायाधीश आर.वी. तम्हाणेकर ने अपने आदेश में कल्पना नीलेश गाइकर को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और जेल की सजा सुनाई, जो 10 अगस्त 2018 से 30 मई 2020 के बीच उसके जेल में बिताई अवधि में पूरी मानी जाएगी।

न्यायाधीश ने उस पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

अतिरिक्त लोक अभियोजक एस.एच. म्हात्रे के अनुसार, यह घटना आठ अगस्त, 2018 को हुई, जब महिला ने अपने छह महीने के बेटे को नाले में डुबो दिया था। महिला काफी समय से बीमार थी और बच्चे के लगातार रोने के कारण उसने यह कदम उठाया।

महिला के वकील सुनील लासने ने नरमी बरतने की गुहार लगाई और अदालत से कहा कि उसके दो और बच्चे हैं, जिनकी उम्र एक और सात साल है।

दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने अपराध के लिए कानून के तहत महिला को अधिकतम सजा (10 साल तक) देने की मांग की।

न्यायाधीश ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के भाग दो (गैर इरादतन हत्या) के तहत आरोप साबित कर दिया है।

अदालत ने कहा, ‘‘ ऐसे कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं हैं, जिससे महिला के आदतन अपराधी या किसी अन्य मामले में दोषी होने की बात सामने आए। साथ ही, यह अपराध भी गंभीर है। महिला को 10 अगस्त 2018 को गिरफ्तार किया गया था और वह अंतरिम जमानत मिलने तक हिरासत में थी। भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के भाग दो में अधिकतम 10 वर्ष कारावास या जुर्माना या दोनों सजा एक साथ दिए जाने का प्रावधान है, अगर कोई काम इस नियत के साथ किया जाए कि इससे किसी की मौत हो…’’

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘ यह ध्यान देने योग्य बात है कि आरोपी एक मां है, जिसके बच्चे की मौत हुई है। इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि उसने अपना बच्चा खोया है। इसलिए दलीलों पर गौर करते हुए, मेरी राय है कि आगे महिला को हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है और इसलिए जो समय उसने जेल में काट लिया है उसके साथ ही मामले में न्याय हो गया है।’’

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा

मनीषा

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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