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Saturday, 7 March, 2026
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धरोहर विशेषज्ञों ने पटना के डच धरोहर भवनों को संरक्षित रखने की अपील की

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(इंट्रो में सुधार करते हुए)

(कुणाल दत्त)

पटना, छह अप्रैल (भाषा) राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की नीदरलैंड यात्रा ने ऐतिहासिक भारत-डच संबंधों की यादें ताजा कर दी हैं। इस दौरान धरोहर विशेषज्ञों ने पटना शहर के इस यूरोपीय देश से संबंध को याद किया तथा प्राधिकारियों से सदियों पुराने जिला कलेक्टरेट भवन व दोनों देशों के अन्य साझा धरोहर को संरक्षित रखने की अपील की।

पटना कॉलेज के मुख्य प्रशासनिक भवन के पास स्थित पटना कलेक्टरेट और गुलजारबाग में अफीम के पुराने गोदाम के भग्नावशेष बिहार की राजधानी के डच इतिहास के अब तक बचे कुछ साक्ष्यों में शामिल हैं।

पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति आर बी पी सिंह ने पटना में अब तक बचे कुछ डच कालीन भवनों का जिक्र किया और टिकाऊ साझा धरोहर के महत्व पर जोर दिया जो न सिर्फ दोनों देशों को बल्कि दोनों संस्कृतियों को, भोगौलिक रूप से अलग रहने के बावजूद एक सूत्र में बांधता है।

सिंह ने कहा, ‘‘यह दुखद है कि 2016 से बिहार सरकार ऐतिहासिक कलेक्टरेट को ध्वस्त करने की कोशिश कर रही है, जो भारत का एक प्रतीक चिह्न है और पटना के नीदरलैंड से संबंधों का गवाह है, जहां की अभी राष्ट्रपति यात्रा पर हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘धरोहर इमारतें भौतिक रूप से दो राष्ट्रों के संबंधों को प्रदर्शित करती हैं ऐतिहासिक भवन को ध्वस्त करने का मतलब उस अदभुद् देश के साथ हमारे साझा अतीत के एक हिस्से को नष्ट करना होगा। ’’

सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि कोविंद 2016 में बिहार के राज्यपाल थे और वह ‘‘अपनी (नीदरलैंड) यात्रा के दौरान पटना के इस साझा हिंद-डच धरोहर के बारे में निश्चित रूप से सोच रहे होंगे। ’’

संरक्षण पुरातत्वविज्ञानी अमृता जेना का मानना है कि कलेक्टरेट एक ऐसा ऐतिहासिक स्थल है जिसका विभिन्न उद्देश्यों से पुन:उपयोग किया जा सकता है।

उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘दोनों देश अपनी पुरानी संस्कृति, आर्थिक एवं राजनयिक संबंध को याद कर रहे हैं क्योंकि हमारे राष्ट्रपति नीदरलैंड की यात्रा पर हैं। और पुरातात्विक धरोहर एक भौतिक माध्यम है जिसके जरिये हम दोनों देशों के उस साझा अतीत को स्पर्श कर सकते हैं। यदि हम इसे ध्वस्त कर देते हैं तो ये चीजें इतिहास के पन्नों तक सिमट कर रह जाएंगी और यह इस तरह की सुंदरता खोने की एक त्रासदी होगी।’’

कोविंद, दो देशों की यात्रा के अपने अंतिम पड़ाव के तहत तुर्कमेनिस्तान से सोमवार को एमस्टर्डम पहुंचे थे। यह 1988 में तत्कालीन राष्ट्रपति आर वेंकटरमण की यात्रा के 34 साल बाद भारत के राष्ट्रपति की प्रथम नीदरलैंड यात्रा है।

भाषा

सुभाष पवनेश

पवनेश देवेंद्र

देवेंद्र

देवेंद्र

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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