पटना, 16 मार्च (भाषा) बिहार विधानसभा में विपक्ष के अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा के कथित अपमान के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा माफी मांगे जाने की मांग को लेकर बुधवार को लगातार दूसरे दिन भी सदन की कार्यवाही बाधित रही।
दोपहर के भोजन के बाद सदन की कार्यवाही जब फिर से शुरू हुई तो मुख्य विपक्षी दल राजद सुलह के मूड में दिखा। हालांकि, वाम दलों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की।
मंत्री बिजेंद्र कुमार यादव ने बिजली विभाग के बजट संबंधी आवंटन की मांग की जिस पर राजद के मुख्य सचेतक ललित यादव ने कटौती प्रस्ताव रखा। इसके बाद राष्ट्रीय जनता दल के नेता ने अध्यक्ष से ‘‘सदन को चलाने’’ का आग्रह किया।
सत्तापक्ष के सदस्यों ने विपक्ष के हंगामे पर शोरगुल किया। उनसे सदन चलने का आग्रह करने के बाद थके हुए दिख रहे अध्यक्ष ने शाम चार बजे तक कार्यवाही स्थगित कर दी।
इससे पहले सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ मिनट के भीतर उसे दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दिया गया। बहरहाल सिन्हा ने ‘‘काले अध्याय’’ को भूलने और आगे बढ़ने की अपील की।
सिन्हा मंगलवार को सदन में उपस्थित नहीं हुए थे लेकिन मुख्यमंत्री के साथ देर रात चली बैठक के बाद बुधवार को वह उपस्थित हुए। इस बैठक को सुलह कराने की कोशिश के तौर पर देखा गया।
मंगलवार को सदन की कार्यवाही बाधित करने के लिए सत्ता पक्ष के सदस्य विपक्ष से नाराज दिखे।
संसदीय मामलों के मंत्री विजय कुमार चौधरी के साथ ही उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने ‘‘सदन की प्रतिष्ठा’’ पर भारी हंगामा करने के लिए विपक्ष को ताना मारा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सदन की प्रतिष्ठा को ‘‘पिछले साल मार्च में तब कुचल दिया गया था’’, जब अध्यक्ष को कई घंटों तक उनके चैम्बर में तब तक बंधक बनाकर रखा जब तक कि पुलिस नहीं आयी और उन्हें बाहर निकाला गया।
विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा और उनमें से कुछ ने आसन के समीप आकर मुख्यमंत्री से ‘‘सफाई और माफी’’ की मांग की। हालांकि, अध्यक्ष ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की एक कविता ‘‘कदम मिलाकर चलना होगा’’ गायी लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ।
गौरतलब है कि बिहार विधानसभा में सोमवार को उस समय विकट स्थिति पैदा हो गई थी जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा के बीच इस बात को लेकर तीखी नोकझोंक हुई कि क्या सरकार द्वारा जांच वाले मामले, जिसे विशेषाधिकार समिति को भी भेजा गया हो, को सदन के पटल पर ‘‘बार-बार’’ उठाया जा सकता है।
सिन्हा ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वासन दिया है कि वह इस प्रतिष्ठित सदन के सम्मान को कम नहीं होने देंगे। सत्तारूढ़ पक्ष और विपक्ष दो आंखों की तरह है और दोनों को सौहार्दपूर्ण रूप से काम करना चाहिए।’’
विपक्षी सदस्यों के इस पर न मानने के बाद सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गयी थी।
भाषा
गोला पवनेश
पवनेश
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