नयी दिल्ली, 18 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कोई भी मानहानिकारक सामग्री और लंदन स्थित रॉयल हिस्टोरिकल सोसाइटी को लिखे गये उस पत्र के प्रकाशन पर सोमवार को रोक लगा दी, जिसमें आरोप लगाया गया है कि इतिहासकार विक्रम संपत ने विनायक दामोदर सावरकर पर अपनी कृति में साहित्यिक चोरी की है।
न्यायमूर्ति अमित बंसल ने संपत द्वरा दायर मानहानि के एक मुकदमे पर शिक्षाविदों ऑड्रे ट्रुश्क, अनन्या चक्रवर्ती, रोहित चोपड़ा और अशोक स्वैन तथा स्वतंत्र (पत्रकार) अभिषेक बक्शी के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किया।
न्यायाधीश ने मुकदमे पर व्यक्तियों, केंद्र और टि्वटर को समन जारी किया तथा कहा कि वादी इतिहासकार ने अंतरिम संरक्षण के लिए प्रथम दृष्टया एक मामला बनाया है क्योंकि पत्र में लिखी गई बातें उनके करियर एवं प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाती हैं।
अदालत ने कहा, ‘‘पत्र के निरंतर प्रकाशन से वादी की प्रतिष्ठा और करियर को काफी नुकसान पहुंच रहा है।’’
अदालत ने कहा, ‘‘इसलिए, सुनवाई की अगली तारीख तक प्रतिवादी संख्या-1 (डॉ ऑड्रे), 2 (डॉ चक्रवर्ती), 3 (डॉ चोपड़ा), 6 (बक्शी) और 7 (स्वैन ) को 11 फरवरी 2022 को लिखे पत्र का प्रकाशन करने से या ट्विटर पर या किसी ऑनलाइन मंच पर कोई मानहानिकारक सामग्री पोस्ट करने से रोका जाता है। ’’
संपत ने अपनी याचिका में कहा कि वह सावरकर की जीवनी के लेखक हैं और रॉयल हिस्टोरिकल सोसाइटी के फेलो हैं।
उन्होंने अदालत को बताया कि इस महीने की शुरूआत में ट्रुश्क, चक्रवर्ती और चोपड़ा ने सोसाइटी को पत्र लिख कर सावरकर की दो खंडों वाली जीवनी के संबंध में साहित्यिक चोरी के गंभीर आरोप लगाये थे।
भाषा
सुभाष नरेश
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