कोलंबो, 15 जुलाई (भाषा) श्रीलंका के उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पूर्व राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना को आदेश दिया कि वह वर्ष 2019 में ईस्टर पर किये गये आतंकी हमले के पीड़ितों को 30 अगस्त से पहले मुआवजे का पूरा भुगतान करें।
सिरिसेना ने उच्चतम न्यायालय में कहा कि 10 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया था जिसमें से 5.8 करोड़ रुपये पहले ही ईस्टर हमले के पीड़ितों को दिये जा चुके हैं। उहोंने बाकी की धनराशि के भुगतान के लिए छह साल की मोहलत मांगी है।
वर्ष 2019 में 11 भारतीयों सहित 270 से अधिक लोग मारे गए थे जब आतंकी संगठन आईएसआईएस से जुड़े स्थानीय इस्लामी चरमपंथी समूह नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) के आत्मघाती हमलावरों ने ईस्टर रविवार को श्रीलंका के तीन गिरजाघरों और कई शानदार होटलों में सिलसिलेवार बम विस्फोट की घटना को अंजाम दिया था।
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को सिरिसेना को ईस्टर हमलों के पीड़ितों को 30 अगस्त से पहले बकाया मुआवजा देने का आदेश दिया।
जनवरी 2023 में उच्चतम न्यायालय ने मौलिक अधिकार याचिका पर सुनवाई करते हुए पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए तत्कालीन राष्ट्रपति सिरिसेना और उनकी पुलिस तथा रक्षा अधिकारियों को आदेश दिया।
उच्चतम न्यायालय ने फैसला सुनाया कि मौलिक अधिकार याचिकाओं में नामित विभिन्न उत्तरदाता आसन्न हमले की विश्वसनीय जानकारी होने के बावजूद वर्ष 2019 में ईस्टर रविवार पर हुए हमलों को रोकने में विफल रहे और याचिकाकर्ताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया।
अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति सिरिसेना को 10 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है जबकि पूर्व पुलिस प्रमुख जयसुंदरा और देश की खुफिया सेवा के पूर्व प्रमुख जयवर्धने को अलग-अलग 7.5 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
पूर्व रक्षा सचिव फर्नांडो को पांच करोड़ रुपये तथा राष्ट्रीय खुफिया सेवा के पूर्व प्रमुख मेंडिस को एक करोड़ रुपये देने का आदेश दिया गया।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि इन सभी धनराशि को एकत्र किया जाना चाहिए और 2019 ईस्टर हमलों के पीड़ितों को मुआवजा देने में इसका इस्तेमाल करना चाहिए।
भाषा संतोष मनीषा
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