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Thursday, 9 April, 2026
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ईरान ने अमेज़न डेटा सेंटर को क्यों बनाया निशाना ?

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(डेनिस मर्फी, जॉर्जिया इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी)

अटलांटा, तीन अप्रैल (द कन्वरसेशन) ईरान द्वारा खाड़ी क्षेत्र में अमेज़न वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस) के डेटा सेंटरों पर किए गए हमलों ने आधुनिक युद्ध में प्रौद्योगिकी ढांचे की बढ़ती भूमिका को उजागर किया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इससे युद्ध की प्रकृति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।

एक मार्च 2026 को तड़के ईरानी शाहेद ड्रोन ने संयुक्त अरब अमीरात में स्थित एडब्ल्यूएस के दो डेटा सेंटरों को निशाना बनाया। इसके अलावा बहरीन में एक अन्य व्यावसायिक डेटा सेंटर भी हमले की चपेट में आया। यह पहली बार है जब किसी देश ने युद्ध के दौरान जानबूझकर व्यावसायिक डेटा सेंटरों पर इस तरह हमला किया है।

ईरान ने बाद में अमेरिकी कंपनियों—माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एप्पल, मेटा, ओरेकल, इंटेल, एचपी, आईबीएम, सिस्को, डेल, पालांटिर और एनवीडिया—को भी निशाना बनाने की चेतावनी दी। खबरों के अनुसार, एक और दो अप्रैल को भी खाड़ी क्षेत्र में डेटा सेंटरों पर हमले किए गए।

ईरान खुद भी ऐसे हमलों का शिकार हुआ है। तेहरान में सरकारी बैंक सेपाह के डेटा सेंटर पर 11 मार्च को मिसाइल हमला हुआ, जिसे अमेरिका या इज़राइल से जोड़ा गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, डेटा सेंटर पहले जासूसी और साइबर हमलों का लक्ष्य रहे हैं, लेकिन इस बार ऐसे हमले किए गए, जिनमें ड्रोन से इमारतों को नुकसान पहुंचाया गया।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते उपयोग के कारण डेटा सेंटरों का महत्व काफी बढ़ गया है। अमेरिकी सेना विभिन्न सैन्य अभियानों में एआई का इस्तेमाल कर रही है, जिसके लिए क्लाउड कंप्यूटिंग ढांचे—जैसे एडब्ल्यूएस—पर निर्भरता बढ़ी है। ऐसे में डेटा सेंटर आधुनिक सैन्य और आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ बन गए हैं।

यह स्पष्ट नहीं है कि जिन डेटा सेंटरों पर हमला हुआ, वे सीधे अमेरिकी सैन्य अभियानों से जुड़े थे या नहीं। माना जा रहा है कि यह हमला संयुक्त अरब अमीरात को उसके अमेरिका से करीबी संबंधों के कारण निशाना बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ये हमले युद्ध की प्रकृति में मौलिक बदलाव का संकेत नहीं देते, लेकिन यह जरूर दिखाते हैं कि अब डेटा सेंटर भी संभावित सैन्य लक्ष्य बन चुके हैं, भले ही वे सीधे सैन्य संचालन से जुड़े न हों।

डेटा सेंटर वह जगह हैं जहां क्लाउड सेवाएं संचालित होती हैं और जिन पर इंटरनेट, मनोरंजन, बैंकिंग और सरकारी सेवाएं निर्भर करती हैं। इन पर हमले से व्यापक व्यवधान पैदा हो सकता है, जैसा कि यूएई में बैंकिंग सेवाओं पर असर से देखा गया।

इन हमलों को आंशिक रूप से “आसान लक्ष्य” भी माना जा रहा है, क्योंकि डेटा सेंटर बड़े, अपेक्षाकृत संवेदनशील और आमतौर पर मजबूत हवाई रक्षा से रहित होते हैं।

इसके बावजूद, जैसे-जैसे एआई और क्लाउड तकनीक का महत्व बढ़ेगा, वैसे-वैसे डेटा सेंटर भविष्य के संघर्षों में अधिक प्रमुख लक्ष्य बन सकते हैं।

ये घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि आधुनिक युद्ध केवल पारंपरिक सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब तकनीकी और आर्थिक ढांचे भी इसकी जद में आ रहे हैं।

( द कन्वरसेशन ) मनीषा नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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