Monday, 27 June, 2022
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जब मोदी को लगे ट्रम्प बेवफा: हुआ किसी भी अन्य एशियाई नेता जैसा सलूक

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अमेरिका में, ट्रम्प और मोदी की दोस्ती हुई। मनीला में, रिश्तों की गर्माहट गायब थी। बुधवार की वार्ता का रद्द होना भारत-अमेरिका संबंधों में अस्थिरता को दर्शाता है।

नई दिल्ली: पिछले आठ महीनों में भारत-अमेरिका संबंधों में स्पष्ट और वर्तमान गिरावट नवम्बर 2017 में नरेन्द्र मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच एक बैठक में देखी जा सकती है, जब प्रधानमंत्री ने महसूस किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने उनका उस गर्मजोशी से स्वागत नहीं किया जैसा उन्होंने पांच महीने पहले जून में उनकी (मोदी) वाशिंगटन यात्रा के दौरान किया था।

नवीनतम नाकामयाबी: अमेरिका ने 6 जुलाई के लिए निर्धारित भारत के साथ एक हाई प्रोफ़ाइल ‘2 + 2’ वार्ता रद्द कर दी है, जिसमें “अपरिहार्य कारणों” का हवाला दिया गया है।

जब मोदी पहली बार वाशिंगटन में ट्रम्प से मिले वे अच्छी दोस्ती करते हुए दिखाई दिए, यहाँ तक कि ट्रम्प ने मोदी को शाबाशी देते हुए यह भी बताया कि आपके पास एक “मित्रवत मीडिया” है। लेकिन नवम्बर 2017 में तीसरी बार जब वे मनीला में आसियान शिखर सम्मेलन में मिले, सूत्रों ने कहा कि मोदी ने महसूस किया कि ट्रम्प उनसे किसी अन्य एशियाई नेता की तरह ही पेश आये।

यह अस्पष्ट है कि ट्रम्प द्वारा यह उपेक्षा इरादतन थी या फिर गैर-इरादतन। कथित तौर पर मोदी और ट्रम्प के बीच वाद-विवाद व्यापार से सम्बंधित मामलों पर हुआ था। कुछ महीने बाद ये मुद्दे नियंत्रण से बाहर हो जायेंगे।

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एक प्रेम-घृणा सम्बन्ध

सूत्रों ने कहा कि प्रधानमंत्री ने महसूस किया कि वाशिंगटन में ट्रम्प द्वारा गर्मजोशी के साथ मिलने बाद से कुछ चीजें काफी हद तक बदल गयीं हैं।

लेकिन उन्होंने नवम्बर के अंत में ग्लोबल इंटरप्रेन्योरशिप समिट के लिए ट्रम्प की बेटी इवांका से मिलने हेतु हैदराबाद की यात्रा करके अपने किए गए वादे को पूरा करने/अपनी बात रखने का फैसला किया।

जल्द ही, दिल्ली के साथ “विशेष संबंधों” में उतार चढ़ाव शुरू हो गए।

ट्रम्प ने पाकिस्तान पर “झूठ और छल” का आरोप लगाते हुए नए साल का ट्वीट किया था, यह वह वाक्यांश था जो पाकिस्तान के लिए मोदी की कठोर नीति को देखते हुए उनके कलेजे को ठंडक पहुंचाता। लेकिन कुछ हफ़्तों बाद, ट्रम्प एक टेलीफोन कॉल का खुलासा कर रहे थे, जो मोदी ने उन्हें फरवरी की शुरुआत में की थी और वादा किया था कि भारत हार्ले डेविडसन मोटरसाइकिलों पर टैरिफ घटाएगा।

जैसा कि ट्रम्प ने अपने स्वयं के प्रतिष्ठान के साथ-साथ अन्तराष्ट्रीय आदेश को श्वांसहीन तीव्रता के साथ समाप्त कर दिया था – अपने अधिकारियों को बर्खास्त करके और विदेश में किम जोंग-उन जैसे दबंग नेताओं तक पहुँच कर – इसलिए इस बीच कुछ लोगों ने दिल्ली में होने वाले बदलावों को महसूस किया।

उदाहरण के लिए, नए साल में प्रधानमंत्री ने अपनी पहली राजनायिक टेलीफोन कॉल भारत के पुराने मित्र, रूस के व्लादिमीर पुतिन को की।

डोकलाम विवाद को हाल ही में हल करने के साथ, चीन के प्रति भारत की विदेश नीति में “कार्यप्रणालीगत संशोधन” शुरू हो गया था।

यह इस पृष्ठभूमि में है कि भारत और अमेरिका के विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच 6 जुलाई की निर्धारित बैठक के – तीन महीनों में दूसरी बार – एकाएक रद्द होने पर विचार होना चाहिए।

अमेरिकी मीडिया यह अनुमान लगा रहा है कि ट्रम्प पुतिन से ठीक इसी तारीख को मिल रहे हैं। एक और खबर यह भी चल रही है कि अमेरिकी राज्य सचिव माइक पोम्पेओ उत्तर कोरिया के साथ अमन के पैगाम को आगे बढ़ाने के लिए शायद प्योंगयांग की यात्रा कर सकते हैं जिसे ट्रम्प ने बहुत महत्व दिया है।

भारतीय और अमेरिकी अधिकारियों ने आशंकाओं को दूर करने की मांग की है। आधिकारिक सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि पोम्पेओ ने तहे दिल से माफ़ी मांगी थी जब उन्होंने बुधवार रात नौ बजकर तीस मिनट पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को फ़ोन किया था और उन्हें बताया था कि वार्ता को आगे स्थगित करना होगा।

सूत्रों ने कहा, “ये चीजें होती हैं। भारत-अमेरिका सम्बन्ध बहुत अच्छे से चल रहे हैं।”

दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के एक प्रवक्ता ने कहा, “अमेरिका-भारत भागीदारी ट्रम्प प्रशासन के लिए एक प्रमुख रणनीतिक प्राथमिकता है।”

लेकिन आलंकारिक भाषा जमीन पर वास्तविकता को छुपा नहीं सकती है।

 उभरता हुआ व्यापार युद्ध

हार्ले डेविडसन बाइकों, चिकित्सा उपकरणों और बादामों पर एक छोटा व्यापार युद्ध क्षितिज पर उभर रहा है। अमेरिका ने ईरान से तेल खरीदने के लिए भारत (या किसी अन्य देश) पर प्रतिबन्ध को हटाने से इनकार कर दिया है – इसके लिए समय सीमा 4 नवम्बर है। और न ही अमेरिकियों ने रूस के साथ भारत के सौदों के लिए भारत के ऊपर से प्रतिबन्ध हटाने का विचार किया है।

अमेरिका की ईरान प्रतिबंधों की घोषणा के मद्देनज़र, सुषमा स्वराज द्वारा दिल्ली में ईरानी विदेश मंत्री जावेद ज़रीफ़ का सार्वजनिक आलिंगन दुनिया भर मशहूर हुआ था।

निश्चित रूप से, दिल्ली आगे आने वाले प्रतिबंधों के बारे में चिंतित है जैसा कि भारत इरान से तेल खरीदने वाला तीसरा सबसे बड़ा खरीददार (चीन सबसे बड़ा खरीददार) है और अब मित्र देशों के माध्यम से रास्ता तलाशने के प्रयास कर रहा है।

अमेरिका पहले ही 241 मिलियन डॉलर कीमत की स्टील और एल्यूमीनियम दर पर भारत को विश्व व्यापार संघ तक ले जा चुका है और दिल्ली ने बदले में अमेरिकी बादाम, स्टेंट और अन्य सामान सहित चिकित्सा उपकरणों के आयात पर प्रतिबन्ध लागू करने की धमकी देकर प्रतिशोध लिया है।

इस बीच, कथित तौर पर दोनों पक्ष एस -400 वायु रक्षा प्रणालियों के बारे में बहस करने के लिए तैयार हैं, जो भारत रूस से खरीदेगा। अमेरिकी कांग्रेस ने अब तक इस गणना पर कोई छूट नहीं दी है।

तथ्य यही रहता है कि ये सभी मुश्किल मुद्दे आम तौर पर बदलती अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में  कठिनाई और नीचता से अधिकारियों द्वारा निपटने हेतु कार्य प्रणाली के लिए समान हैं। लेकिन जब नेताओं के बीच का तनाव सरकारों में फैलता है, तो पतन को रोकना मुश्किल होता है।

बदलती गतिशीलता

कुछ ही साल पहले, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के लिए प्यार का दिखावा कर रहे थे – उनके अमर शब्द थे, “भारत आपको प्यार करता है।”

मोदी को वह दोस्ती विरासत में मिली। 2002 के गुजरात दंगों में उनकी कथित भूमिका के कारण अमेरिकियों ने उन्हें अमेरिका में प्रवेश करने से प्रतिबंधित कर दिया था, इसके बावजूद अमेरिकियों ने लीक से हटकर उनके लिए संशोधन किए थे|

ट्रम्प की मनमानी, जिसमें उनकी इच्छा पर उनके अपने मंत्रियों की बर्खास्तगी शामिल है, ने भी इन मामलों में मदद नहीं की है।

मार्च में ही, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अपने समकक्ष एच.आर. मैकमास्टर से मिलने के लिए वाशिंगटन की यात्रा की। कुछ ही दिनों के भीतर वह चले गए और जॉन बोल्टन द्वारा उन्हें प्रतिस्थापित कर दिया गया।

बाकी दुनिया की तरह दिल्ली भी राज्य के दो सचिवों, दो प्रमुख कर्मचारियों और तीन एनएसए के अमेरिका में तेजी से प्रवेश और बाहर निकलने पर आश्चर्यचकित है।

बुधवार की रात सुषमा स्वराज को पोम्पिओ की कॉल का यथार्थ कारण हो सकता है। लेकिन तथ्य यही है कि “2+2 मीटिंग” में इन सभी कठिन मुद्दों को सुलझाने का अवसर अब अज्ञात भविष्य के लिए स्थगित कर दिया गया है।

Read in English : When Narendra Modi felt Donald Trump treated him like ‘just another Asian leader’

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