( एंद्रियास शोलेनहार्ट, यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड )
क्वींसलैंड (ऑस्ट्रेलिया), 23 अक्तूबर (द कन्वरसेशन) पेरिस के लुव्र संग्रहालय से कीमती आभूषणों की दुस्साहस पूर्ण चोरी ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि दिनदहाड़े इस तरह की वारदात आखिर कैसे संभव हुई और चोरी किए गए गहनों का अब क्या होगा ?
कुछ ही मिनटों में चार चोर पहली मंजिल की खिड़की से अंदर घुसे, कांच के सुरक्षित डिस्प्ले केस तोड़े और नौ कीमती आभूषण चुरा ले गए। अलार्म बजने और पास में ही सुरक्षाकर्मियों के होने के बावजूद, वे मोटरसाइकिलों पर सवार होकर तेजी से भाग निकले। भागते समय उन्होंने एक आभूषण गिरा दिया। गिरने वाला आभूषण नेपोलियन तृतीय की पत्नी महारानी यूजिनी का शाही मुकुट था जिसमें हीरे और पन्ने जड़े थे।
चोरी किए गए आभूषणों में फ्रांसीसी साम्राज्यकाल के ब्रोच, हार, झुमके और एक ताज शामिल हैं। फ्रांसीसी अभियोजन कार्यालय ने बताया कि इन आभूषणों की कीमत लगभग 8.8 करोड़ यूरो (लगभग 15.7 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर) है, जिसमें उनका ऐतिहासिक मूल्य शामिल नहीं है।
इस चोरी के तरीके और पेशेवर अंदाज से स्पष्ट है कि यह एक योजनाबद्ध अपराध था, जिसे अत्यधिक प्रशिक्षित अपराधियों ने अंजाम दिया। यह लोग संभवतः संगठित अपराध गिरोहों से जुड़े हुए थे।
हाल के हफ्तों में फ्रांस के अन्य संग्रहालयों से भी कुछ छोटे स्तर की चोरी की खबरें आई हैं, जैसे पेरिस के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम से सोने के टुकड़ों की चोरी। लेकिन अधिकारियों ने इन घटनाओं का लुव्र चोरी से कोई संबंध नहीं बताया है।
चोरी किए गए आभूषणों का अब क्या होगा?
चुराए गए आभूषण अत्यंत प्रसिद्ध और पहचानने योग्य हैं, जिससे उन्हें ब्लैक मार्केट में बेचना बेहद कठिन, लगभग असंभव होगा। यह समस्या अन्य प्रसिद्ध चोरी की घटनाओं में भी देखी गई है — जैसे 2017 में बर्लिन के बोडे म्यूजियम से कनाडा का विशाल “बिग मेपल लीफ” सोने का सिक्का चोरी होना, या 1990 में बोस्टन के इसाबेला स्टुअर्ट गार्डनर म्यूजियम से डिगास, माने और रेम्ब्रांट की 13 पेंटिंग्स की चोरी। ये पेंटिंग आज तक बरामद नहीं हुईं।
विशेषज्ञों के अनुसार, चोरी किए गए लुव्र के गहनों को दो तरीके से ठिकाने लगाए जाने की संभावना है।
पहली संभावना : आभूषणों को तोड़कर छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दिया जाएगा। हीरे और रत्नों को निकालकर अलग-अलग रूप में बेचा जा सकता है, जबकि सोना-चांदी पिघलाकर नए आभूषण बनाए जा सकते हैं या अलग से बेचे जा सकते हैं। इस तरह उनको तथा उनके स्रोत को छिपाना आसान हो जाएगा। हालांकि इस तरह मिलने वाला कुल मूल्य, मूल गहनों की तुलना में काफी कम रहेगा। इसलिए संभव है कि चोरों का मुख्य उद्देश्य यह न रहा हो।
दूसरी संभावना : चोर या उनके मास्टरमाइंड गहनों को वापस लौटाने के बदले लुव्र या फ्रांसीसी सरकार से फिरौती या धन की मांग कर सकते हैं। यह लेनदेन दलालों या मध्यस्थों के माध्यम से गुप्त रूप से हो सकता है, संभवतः तब जब मीडिया का ध्यान इस घटना से हट जाए।
गहनों के ऐतिहासिक महत्व और इस चोरी से हुई प्रतिष्ठा हानि को देखते हुए, विशेषज्ञों का मानना है कि लुव्र और फ्रांसीसी सरकार उन्हें जल्द से जल्द वापस पाने के लिए गुप्त बातचीत पर विचार कर सकते हैं।
फिर भी, ये अभी तक सिर्फ अनुमान हैं — चोरी को कुछ ही दिन हुए हैं और अब भी यह स्पष्ट नहीं है कि अपराधियों के पीछे कौन है और उनका उद्देश्य क्या था।
ड्रेस्डन की चोरी से समानताएँ
लुव्र की यह घटना 2019 में जर्मनी के ड्रेस्डन स्थित ग्रीन वॉल्ट म्यूजियम में हुई प्रसिद्ध आभूषण चोरी की याद दिलाती है। उस मामले में अपराधियों ने कई दिन तक संग्रहालय की सुरक्षा प्रणाली का बारीकी से अध्ययन किया था और कैमरों की नजर से बचते हुए पहली मंजिल की खिड़की से अंदर घुसकर कुछ ही मिनटों में 21 आभूषण चुरा लिए थे।
ड्रेस्डन की चोरी रात में हुई थी और चोरों ने डिस्प्ले केसों को तोड़ने के लिए बल प्रयोग किया था।
कई वर्षों बाद जर्मन अधिकारियों ने अपराधियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया। ये सभी बर्लिन-स्थित एक कुख्यात अपराधी परिवार के सदस्य थे। अब वे लंबी सजा काट रहे हैं, और चोरी किए गए अधिकतर आभूषण बिना किसी क्षति के बरामद कर लिए गए हैं।
उम्मीद की जा रही है कि फ्रांसीसी अधिकारी भी इसी तरह जल्द सफलता हासिल करेंगे।
( द कन्वरसेशन ) मनीषा वैभव
वैभव
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