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Wednesday, 27 August, 2025
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हल्के या मध्यम स्तर के ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों की सहायता का क्या है सर्वश्रेष्ठ तरीका?

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(डेविड ट्रेमबेथ और कैंडीस वर्सिन, द किड्स रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑस्ट्रेलिया/ एंड्र्यू व्हाइटहाउस, यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया)

पर्थ (ऑस्ट्रेलिया), 27 अगस्त (द कन्वरसेशन) ऑटिज्म से पीड़ित ऐसे बच्चे 2027 के मध्य से राष्ट्रीय विकलांगता बीमा योजना (एनडीआईएस) के पात्र नहीं होंगे, जिनका विकास धीमा या मध्यम स्तर का है।

इसके बजाय थ्राइविंग किड्स नामक नयी सहायता प्रणाली के तहत उनका मार्गदर्शन किया जाएगा। हालांकि यह प्रणाली अभी पूरी तरह से तैयार नहीं है, लेकिन इसका उद्देश्य समुदाय-आधारित सेवाओं के माध्यम से सहायता प्राप्त करने वाले बच्चों को प्राथमिकता देना है।

स्वाभाविक रूप से, कुछ माता-पिता और पेशेवर लोग चिंतित हैं, तथा कई लोग पूछ रहे हैं कि क्या नए कार्यक्रम के तहत भी वैसी ही सहायता मिल पाएगी जैसी एनडीआईएस के माध्यम से प्रदान की जा रही है।

हालांकि इस नीति का प्रभाव तो समय ही बताएगा, लेकिन अब सबसे जरूरी काम यह परिभाषित करना और लागू करना है कि ऑटिस्टिक बच्चों के लिए सर्वोत्तम विकल्प क्या है।

इस घोषणा के साथ ही ऑटिज्म और विकासात्मक विलंब को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे का विकास उसकी आयु की तुलना में धीमा होता है।

विकलांगता और एनडीआईएस मंत्री मार्क बटलर ने ‘हल्के से मध्यम स्तर के ऑटिज़्म’ से पीड़ित बच्चों का जिक्र किया, जो वास्तव में कोई रोग नहीं है। आज के दौर में ऑटिज़्म के बारे में बातचीत के समय इसपर बात नहीं की जाती।

एक स्पष्ट तरीका यह हो सकता था कि उन बच्चों को थ्राइविंग किड्स के लिए लक्षित समूह के रूप में संदर्भित किया जाता, जिनका विकास देरी से होता है।

ऐसा करना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नैदानिक ​​दृष्टिकोण से, ऑटिज़्म जीवनभर चलने वाली विकास से संबंधित एक स्थिति है जो व्यक्ति के अन्य लोगों और अपने आसपास की दुनिया को समझने और उनके साथ बातचीत करने के तरीके को प्रभावित करती है।

बच्चे ‘ऑटिज्म से उबर’ नहीं पाते, लेकिन समय के साथ उनकी जरूरतें बदल सकती हैं।

विकासात्मक विलंब एक शब्द है जिसका उपयोग तब किया जाता है जब कोई बच्चा विकास के एक या अधिक पहलुओं, जैसे शारीरिक गतिविधि, बात करने या समझने में अपने साथियों से पीछे होता है।

कई ऑटिस्टिक बच्चों के विकास में देरी होती है, लेकिन सभी में नहीं।

तीन साल के ऑटिस्टिक बच्चे के शारीरिक विकास में हल्की देरी हो सकती है, जिसका असर खेलते समय किसी चीज़ पर चढ़ने की उसकी क्षमता पर पड़ता है। पांच साल के ऑटिस्टिक बच्चे में भाषा सीखने में मध्यम देरी हो सकती है, जिसका असर कक्षा में निर्देशों को समझने और उनका पालन करने की उसकी क्षमता पर पड़ता है। लेकिन एक अन्य ऑटिस्टिक बच्चा अपने विकासात्मक पड़ावों के लिए अपेक्षित आयु स्तर पर या उससे ऊपर हो सकता है।

लगभग 25 प्रतिशत ऑटिस्टिक बच्चों में गंभीर विकलांगता होती है, जिसका अर्थ है कि उन्हें सुरक्षित रहने के लिए चौबीस घंटे निगरानी और सहायता की आवश्यकता होती है।

ऑटिज़्म और विकासात्मक विलंब को अलग-अलग, लेकिन संबंधित मानकर, हम ‘सभी क्षेत्रों में’ बच्चों की विभिन्न आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझकर पूरा कर पाते हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि हल्के से मध्यम विकासात्मक विलंब वाले ऑटिस्टिक बच्चों के लिए सर्वोत्तम विकल्प क्या है?

ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय दिशानिर्देशों में ऑटिस्टिक बच्चों और उनके परिवारों की शिक्षा, भागीदारी व कल्याण को बढ़ावा देने के लिए सुझाव दिए गए हैं।

दिशानिर्देश में बच्चों और परिवारों को केन्द्र में रखते हुए सिद्धांत-आधारित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। इसमें लक्ष्य-निर्धारण, किस तरह की सहायता दी जानी चाहिए और कैसी दी जानी चाहिए इसका निर्धारण, परिणामों की निगरानी और सुरक्षा के लिए सिफारिशें शामिल हैं।

ऑटिस्टिक बच्चों की सहायता के लक्ष्य सभी बच्चों के लक्ष्यों से अलग नहीं हैं। उन्हें प्यार, रोजमर्रा की गतिविधियों के जरिए सीखने के अवसर और परिवार, संस्कृति व समुदाय के साथ मज़बूत जुड़ाव की जरूरत होती है।

अंतर तब आता है जब बच्चे संघर्ष कर रहे होते हैं, और सवाल यह उठता है कि कौन सी अतिरिक्त सहायता मददगार होगी। इस व्यापक समझ को ध्यान में रखने से अतिरिक्त सहायता से जुड़ा हर फ़ैसला स्पष्ट और ज्यादा सुसंगत हो जाता है।

दिशानिर्देश में कहा गया है कि प्रत्येक बच्चे और परिवार के लिए सहायता व्यक्तिगत होनी चाहिए। ऑटिस्टिक बच्चों की सहायता के लिए कोई एक समान दृष्टिकोण नहीं है जो प्रत्येक बच्चे और परिवार के लिए समान रूप से लाभकारी हो।

प्रणालीगत स्तर पर, इसका अर्थ है सहायता का एक चरणबद्ध देखभाल मॉडल जिसमें बच्चे की उम्र, विकासात्मक स्तर, आवश्यकताओं और पारिवारिक परिस्थितियों के अनुरूप सही प्रकार की सहायता सही समय पर और सही मात्रा में प्रदान की जाए। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वोत्तम तरीका है और हमें इसके लिए प्रयास करना चाहिए।

(द कन्वरसेशन) जोहेब नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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