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Thursday, 29 January, 2026
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भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते को अमेरिकी वित्त मंत्री ने बेहद निराशाजनक बताया

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(योषिता सिंह)

न्यूयॉर्क, 29 जनवरी (भाषा) भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को “बेहद निराशाजनक” बताते हुए अमेरिका ने कहा कि इस व्यापार समझौते के कारण यूरोपीय देश नयी दिल्ली से रूसी तेल की खरीद पर शुल्क (टैरिफ) लगाने में वाशिंगटन का साथ नहीं देना चाहते।

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को समाचार चैनल ‘सीएनबीसी’ के कार्यक्रम ‘स्क्वॉक ऑन द यूएस स्ट्रीट’ में कहा, “वे जो अपने लिए बेहतर समझें, वह करें, लेकिन मैं आपको बता दूं कि यूरोपीय देशों का रवैया बहुत निराशा करने वाला है, क्योंकि वे यूक्रेन-रूस युद्ध में सबसे आगे हैं।”

बेसेंट यूरोप और भारत के बीच हुए “बड़े” व्यापार समझौते और इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या यह अमेरिका के लिए खतरा है, क्योंकि ये देश वाशिंगटन की सहमति के बिना मुक्त व्यापार की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

उन्होंने कहा, “…भारत ने प्रतिबंधित रूसी तेल खरीदना शुरू कर दिया, और अनुमान लगाइए परिष्कृत उत्पाद कौन खरीद रहा था? यूरोपीय देश। इसलिए, यूरोपीय देश अपने ही खिलाफ युद्ध को वित्त पोषित कर रहे हैं, और यह कुछ ऐसा है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।”

बेसेंट ने कहा, “अमेरिका ने भारत पर रूस से तेल खरीदने के लिए प्रतिबंध या 25 प्रतिशत शुल्क लगाया। यूरोपीय देश हमारा साथ नहीं देना चाहते और ऐसा लगता है कि वे इस व्यापार समझौते को करना चाहते थे। इसलिए, जब भी आप किसी यूरोपीय को यूक्रेन के लोगों का हिमायती बनते देखें, याद रखें कि उन्होंने व्यापार को यूक्रेन के लोगों से ऊपर रखा। व्यापार—यूरोपीय व्यापार, यूक्रेन में युद्ध खत्म करने से ज्यादा महत्वपूर्ण।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या यूरोपीय देशों को ऊर्जा की जरूरत है, तो बेसेंट ने कहा, “वे सस्ती ऊर्जा चाहते हैं, लेकिन अगर हम प्रतिबंधित रूसी तेल खरीदने को तैयार होते, तो हमें भी सस्ती ऊर्जा मिल सकती थी।”

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए इस व्यापार समझौते पर लगातार दूसरे दिन अमेरिका के किसी नेता ने इसी तरह की टिप्पणियां की हैं। इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील’ कहा गया है।

मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने नयी दिल्ली में इस व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। उसी दिन अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा था कि इस व्यापार समझौते में भारत सबसे बड़ा लाभार्थी रहा।

भाषा खारी संतोष

संतोष

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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