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Tuesday, 6 January, 2026
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रूसी तेल खरीद को लेकर ट्रंप ने भारत पर नए टैरिफ की धमकी दी, कहा: ‘मुझे खुश रखना जरूरी था’

यह ताज़ा टिप्पणी ऐसे समय आई है जब नई दिल्ली और वॉशिंगटन ने अभी तक कोई ट्रेड एग्रीमेंट साइन नहीं किया है. भारत ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है, लेकिन मॉस्को अभी भी कच्चे तेल का सबसे बड़ा सोर्स बना हुआ है.

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नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर भारत रूस के साथ व्यापार जारी रखता है, खासकर रूसी तेल की खरीद को लेकर, तो अमेरिका भारत पर “बहुत जल्दी” शुल्क बढ़ा सकता है.

ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान रविवार को कहा, “मोदी बहुत अच्छे आदमी हैं. हां. वह अच्छे आदमी हैं. उन्हें पता था कि मैं खुश नहीं था, और मुझे खुश रखना जरूरी था. वे व्यापार करते हैं. और हम उन पर बहुत जल्दी शुल्क बढ़ा सकते हैं, और यह उनके लिए बहुत बुरा होगा. और मैं आपको एक बात बताता हूं. रूसी अर्थव्यवस्था खराब है.”

अमेरिकी राष्ट्रपति का यह ताजा बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका ने पिछले साल अगस्त में रूस से तेल की खरीद जारी रखने पर भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाया था. अमेरिका में भारत के निर्यात पर 50 प्रतिशत तक का शुल्क लगता है, जो सबसे ऊंची दरों में से एक है.

फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने मॉस्को से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है. वित्त वर्ष 2024-2025 में यह आयात बढ़कर 50 अरब डॉलर से अधिक हो गया.

रूसी तेल आयात में बढ़ोतरी का एक बड़ा कारण 2022 के अंत में जी7 देशों द्वारा लगाया गया प्राइस कैप है. जी7 में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जापान, इटली, जर्मनी और यूरोपीय संघ शामिल हैं. इस प्राइस कैप के तहत रूसी तेल को 60 डॉलर प्रति बैरल से कम कीमत पर बेचने की कल्पना की गई थी, ताकि रूस की तेल से होने वाली आय पर असर पड़े और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर प्रभाव कम रहे.

यह व्यवस्था काफी हद तक भारत की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई थी. हालांकि, पिछले साल ट्रंप की व्हाइट हाउस में वापसी के बाद रूसी ऊर्जा खरीद पर अमेरिका का रुख बदल गया. अमेरिकी राष्ट्रपति भारत पर अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद खरीदने का दबाव बना रहे हैं, और नई दिल्ली ने इसके लिए अपनी इच्छा भी जताई है.

इसके बावजूद रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है. वित्त वर्ष 2025-2026 में अक्टूबर 2025 तक भारत ने करीब 31.6 अरब डॉलर का रूसी कच्चा तेल आयात किया. यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों में दी गई है.

रूसी कच्चे तेल का आयात साल-दर-साल आधार पर करीब 10 प्रतिशत घटा है, और उम्मीद है कि इसमें और कमी आएगी. अमेरिका द्वारा रूस की दो बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद इसमें और गिरावट आने की संभावना है.

अमेरिका ऐसे कानून पर भी विचार कर रहा है, जिसके तहत रूस के साथ व्यापार जारी रखने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक शुल्क लगाया जा सकता है. यह विधेयक सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने आगे बढ़ाया है, जो लंबे समय से मॉस्को और उसके साथ व्यापार करने वाले देशों के खिलाफ मुखर रहे हैं.

ग्राहम ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से कहा, “मैं करीब एक महीने पहले भारतीय राजदूत के घर गया था, और वह सिर्फ इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि भारत रूसी तेल कम खरीद रहा है. क्या आप राष्ट्रपति से कहेंगे कि शुल्क कम कर दें. यह तरीका काम करता है. इसलिए मुझे उम्मीद है कि हम यह बिल लाएंगे, और यह शून्य से 500 तक जाएगा.”

अमेरिकी सीनेटर ने आगे कहा, “वह ट्रंप ही हैं जो संख्या तय करते हैं. कोई और नहीं. लेकिन अगर आप सस्ता रूसी तेल खरीद रहे हैं और पुतिन की युद्ध मशीन को चला रहे हैं, तो हम राष्ट्रपति को यह ताकत देना चाहते हैं कि शुल्क के जरिए इसे एक कठिन फैसला बना दिया जाए.”

भारत शुल्क में राहत के बदले अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहा है. नई दिल्ली का ताजा प्रस्ताव, जिसे अब तक का सबसे अच्छा माना जा रहा है, अमेरिकी प्रशासन के विचाराधीन है. हालांकि, रुकी हुई वार्ताओं पर अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है, और फिलहाल आगे प्रत्यक्ष बातचीत के दौर पर विचार नहीं किया जा रहा है.

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा इंपोर्ट डेस्टिनेशन है. अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच भारत का निर्यात करीब 50.8 अरब डॉलर रहा. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के ताजा व्यापार आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में गिरावट के बावजूद, शुल्क लगाए जाने के बाद अक्टूबर और नवंबर में अमेरिका को भारत का निर्यात बढ़ता रहा है.

ट्रंप भारत के साथ व्यापार संतुलन बनाने पर जोर दे रहे हैं और नई दिल्ली से अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए अपने बाजार खोलने की मांग कर रहे हैं. भारत ने साफ किया है कि कृषि और डेयरी क्षेत्र किसी भी व्यापार समझौते के लिए रेड लाइन हैं. इसी बीच, नई दिल्ली ने निर्यात बढ़ाने के लिए दिसंबर में ओमान और न्यूजीलैंड के साथ दो मुक्त व्यापार समझौतों की घोषणा की है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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