Thursday, 20 January, 2022
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अमेरिकी सांसदों ने ‘इस्लामोफोबिया’ से निपटने के लिए प्रतिनिधि सभा में पेश किया विधेयक

इस विधेयक में भारत को मुस्लिमों के खिलाफ कथित अत्याचारों के लिए चीन और म्यांमार की श्रेणी में रखने का प्रावधान है.

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वाशिंगटन: इल्हान उमर समेत अमेरिका के 30 से अधिक सांसदों के एक समूह ने दुनियाभर में ‘इस्लामोफोबिया’ (इस्लाम धर्म या मुस्लिमों के प्रति घृणा, डर या पूर्वाग्रह की भावना) बढ़ने की घटनाओं के खिलाफ प्रतिनिधि सभा में एक विधेयक पेश किया है.

विधेयक में विदेश मंत्रालय से देशों द्वारा प्रायोजित इस्लोमोफोबिया संबंधी हिंसा और दंड मुक्ति को अपनी वार्षिक मानवाधिकार रिपोर्ट में शामिल करने का अनुरोध किया गया है. सांसदों के समूह ने कहा कि विशेष दूत नियुक्त करने से नीति निर्माताओं को मुस्लिम विरोधी कट्टरता की वैश्विक समस्या को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी.

इस विधेयक में भारत को मुस्लिमों के खिलाफ कथित अत्याचारों के लिए चीन और म्यांमार की श्रेणी में रखने का प्रावधान है.

भारत के विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था, ‘भारत को अपनी धर्मनिरपेक्ष साख, सहिष्णुता और समावेशिता की दीर्घकालीन प्रतिबद्धता के साथ सबसे बड़े लोकतंत्र और बहुलवादी समाज के तौर पर अपने दर्जे पर गर्व है.’

उसने कहा था कि भारतीय संविधान में अल्पसंख्यक समुदायों समेत उसके सभी नागरिकों को मौलिक अधिकार दिए गए हैं. उसने कहा था कि यह व्यापक मान्यता है कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है जहां संविधान धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करता है और जहां लोकतांत्रिक सुशासन और कानून की व्यवस्था, मौलिक अधिकारों को बढ़ावा देती है और उनकी रक्षा करती है.

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कांग्रेस सदस्य उमर ने कहा, ‘हम दुनिया के हर कोने में इस्लामोफोबिया में वृद्धि देख रहे हैं.’

उनके कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया है, ‘चाहे चीन में उइगर समुदाय और म्यांमार में रोहिंग्या के खिलाफ किए जा रहे अत्याचार हों, भारत और श्रीलंका में मुस्लिम आबादी के खिलाफ कार्रवाई, हंगरी और पोलैंड में मुस्लिम शरणार्थियों और अन्य मुस्लिमों को बलि का बकरा बनाना, न्यूजीलैंड और कनाडा में मुस्लिमों को निशाना बनाते हुए श्वेतों के वर्चस्व वाले लोगों की हिंसा के कृत्य या मुस्लिम बहुल देश जैसे कि पाकिस्तान, बहरीन और ईरान में अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदायों को निशाना बनाना हो, इस्लामोफोबिया की समस्या वैश्विक है.’


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